दांव पर मरीजों की जिंदगी: आगरा के 237 अस्पतालों में नहीं फायर NOC, अग्निशमन नियमों की उड़ रहीं धज्जियां
अस्पतालों में मरीजों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। 237 अस्पतालों में अग्निशमन विभाग से एनओसी नहीं है। इनमें आग से निपटने के उपकरण और मानक नहीं हैं। ऐसे में बिहार के मुजफ्फरपुर जैसी घटना होने का खतरा बना हुआ है। स्वास्थ्य विभाग में बीते साल 1317 चिकित्सकीय संस्थान पंजीकृत हैं, जिसमें 487 अस्पताल हैं। अग्निशमन विभाग से करीब 250 अस्पतालों को ही एनओसी दी गई है, जबकि 237 बिना एनओसी के ही संचालित हो रहे हैं। ऐसे में यहां आग लगने की घटना होने पर मरीजों की जान का खतरा बना हुआ है। अधिकांश में तो आईसीयू भी चल रही हैं। वर्तमान में 2025-30 के लिए लाइसेंस नवीनीकरण की प्रक्रिया भी चल रही है। कई अस्पताल संचालकों ने अग्निशमन विभाग की पुरानी एनओसी ही लगा दी है। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग बेखबर बना हुआ है। यह हाल तब है जब 2022 में नरीपुरा स्थित आर मदुराज अस्पताल में आग लगने से डॉक्टर और उनके दो बच्चों की मौत हो गई थी। निरीक्षण में 40 फीसदी में मिली थीं खामियां 2024 में अग्निशमन विभाग, पुलिस-प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने 100 से अधिक अस्पतालों का निरीक्षण किया था। इनमें 40 फीसदी में आग बुझाने के मानक नहीं मिले थे। उपकरण भी खराब मिले थे। पानी के लिए टैंक की खानापूर्ति की थी। प्रवेश व निकासी के लिए एक ही गेट था। ऐसी तमाम खामियों पर नोटिस भी दिए लेकिन दोबारा भौतिक सत्यापन नहीं किया गया। इनका ये है कहना: 250 अस्पतालों के पास ही है फायर एनओसी मुख्य अग्निशमन अधिकारी देवेंद्र कुमार का कहना है कि करीब 250 अस्पतालों को ही अग्निशमन विभाग से एनओसी दी गई है, बाकी को कैसे लाइसेंस दिया। इसकी स्वास्थ्य विभाग ही जानकारी दे सकता है। समय-समय पर अस्पतालों का निरीक्षण कर मानकों का आकलन भी करते हैं। सभी अस्पतालों से मांगे जा रहे हैं प्रमाणपत्र सीएमओ डॉ.अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग में 487 अस्पताल पंजीकृत हैं। लाइसेंस नवीनीकरण की प्रक्रिया भी चल रही है। सभी से अग्निशमन विभाग की एनओसी समेत अन्य प्रमाणपत्र भी मांगे गए हैं। अधूरे मानक वालों का लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। अग्निशमन विभाग के नए नियमों में पेंच से देरी आईएमए अध्यक्ष डॉ. पंकज नगायच ने बताया कि अग्निशमन विभाग की एनओसी के लिए सभी अस्पताल संचालक आवेदन कर चुके हैं। नियमों में बदलाव किया है। इनमें कई पेंच और जटिल शर्तें हैं। इनका पालन करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं हो पा रहा है। आग से निपटने के जरूरी इंतजाम करने को निर्देशित किया है। स्वास्थ्य विभाग में बीते साल ये हैं पंजीकृत 487: अस्पताल 577: क्लीनिक 150: पैथोलॉजी लैब 103: डायग्नोस्टिक सेंटर
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 06, 2026, 06:14 IST
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