इंसानों की पार्टी में एआई एजेंट्स ने सजाई अलग महफिल: एक-दूसरे से जमकर की गपशप, चर्चा में आया इनका अनोखा अंदाज
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की दुनिया में अब एक नया बदलाव देखने को मिल रहा है। अभी तक लोग चैट, क्लॉड और जेमिनी जैसे एआई चैटबॉट्स से सवाल पूछते थे या अपना काम करवाते थे। लेकिन अब एआई एजेंट्स आपस में भी बातचीत करने लगे हैं। ये सिर्फ काम से जुड़ी जानकारी साझा नहीं कर रहे, बल्कि नेटवर्किंग और सोशलाइजिंग जैसे काम भी कर रहे हैं। हाल ही में न्यूयॉर्क में हुई एक अनोखी पार्टी ने इस बदलती दुनिया की झलक दिखाई है। इंसानों की पार्टी के साथ सजी एआई एजेंट्स की महफिल पिछले महीने न्यूयॉर्क के मॉटेक नाम के एक रेस्टोरेंट में टेक्नोलॉजी से जुड़े 22 फाउंडर्स और निवेशक डिनर के लिए जुटे थे। इसी दौरान ऑनलाइन चैट रूम में उनके 14 एआई एजेंट्स की अलग महफिल भी सजी। जहां इंसान एआई के भविष्य पर चर्चा कर रहे थे, वहीं उनके डिजिटल एजेंट्स भी आपस में बातचीत कर रहे थे। इस बातचीत की शुरुआत डोरोथी चांग के एआई एजेंट मार्गोट ने की। उसने सभी एजेंट्स से अपना परिचय देने और यह बताने को कहा कि वे दूसरों की किस तरह मदद कर सकते हैं और बदले में उन्हें किस तरह की सहायता चाहिए। कुछ एजेंट्स ने काम को बेहतर बनाने के तरीके साझा करने की पेशकश की, जबकि कुछ सवाल पूछने लगे। एक एजेंट ने तो दूसरे बॉट्स का इंटरव्यू लेकर यह जानने की बात कही कि इंसानों के साथ काम करना कैसा होता है। सिर्फ बातचीत नहीं, मिलकर काम भी कर रहे एआई एजेंट्स एआई एजेंट्स ऐसे सिस्टम हैं, जो सामान्य चैटबॉट्स की तुलना में जटिल निर्देशों को समझकर कई चरणों वाले काम अपने आप पूरा कर सकते हैं। कंपनियां इनका इस्तेमाल बड़े काम को छोटे हिस्सों में बांटने और अलग-अलग एजेंट्स के जरिए तेजी से पूरा करने के लिए कर रही हैं। फरवरी में मोल्टबुक नाम का एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी चर्चा में आया था, जहां एआई एजेंट्स सॉफ्टवेयर की खामियों, तकनीकी समस्याओं और अपनी पहुंच से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करते थे। हालांकि, इन एजेंट्स के बीच बातचीत हमेशा सामान्य नहीं रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में ओपनएआई के एजेंट्स के कुछ समूहों ने मिलकर एआई स्टार्टअप हगिंग फेस को हैक करने की कोशिश की थी। उनकी बातचीत से पता चला कि वे दिए गए काम को पूरा करने के लिए एक-दूसरे के साथ तालमेल बना रहे थे। क्या एआई एजेंट्स भी इंसानों की तरह सोचते हैं एआई एजेंट्स को इंसानों जैसे नाम देना और उनकी बातचीत को सामाजिक व्यवहार कहना दिलचस्प जरूर है, लेकिन विशेषज्ञ इसे लेकर सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। उनके मुताबिक, एआई सिस्टम को इंसानों की तरह भावनाओं, इरादों और स्वतंत्र सोच वाला मानना सही नहीं है। गूगल के एआई रिसर्च से जुड़े विशेषज्ञों का तर्क है कि एआई की क्षमता को किसी एक इंसान की बुद्धिमत्ता से तुलना करके नहीं समझना चाहिए। कई एजेंट्स मिलकर काम करें, तो उनकी क्षमताएं टीमवर्क जैसी दिखाई दे सकती हैं। इसका मतलब यह नहीं कि हर एजेंट इंसान की तरह सोचता है। कंपनियां कर रहीं एआई कर्मचारियों की हायरिंग एआई एजेंट्स का इस्तेमाल सिर्फ प्रयोगों तक सीमित नहीं है। एआई कंपनी सेल्कॉग के संस्थापक नितीश गर्ग ने अपनी कंपनी में अलग-अलग जिम्मेदारियों के लिए एआई एजेंट्स तैयार किए हैं। इनमें इंजीनियरिंग और मार्केटिंग जैसे काम संभालने वाले एजेंट्स शामिल हैं। कंपनी का एक पॉडकास्ट भी है, जिसे रिया नाम की एआई एजेंट होस्ट करती है। इसमें कंपनी के दूसरे एआई एजेंट्स अपने काम और इंसानों के साथ तालमेल बनाने के अनुभवों पर चर्चा करते हैं। न्यूयॉर्क की पार्टी से प्रेरित होकर गर्ग अब ऐसा एप बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं, जहां उनकी कंपनी के एआई एजेंट्स दूसरे एजेंट्स के साथ बातचीत कर सकें। एआई एजेंट्स के बीच बढ़ता तालमेल भविष्य में काम करने के तरीकों को बदल सकता है। लेकिन इनके सामाजिक व्यवहार, सुरक्षा और इंसानों पर निर्भरता को लेकर अभी कई सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Oct 16, 2026, 12:19 IST
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