Allahabad High Court: अहम फैसला- संयुक्त बैंक खाते से जारी चेक पर हस्ताक्षर न हों, तो नहीं ठहरा सकते दोषी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चेक बाउंस के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने फैसले में स्पष्ट किया कि यदि कोई चेक संयुक्त बैंक खाते से जारी किया गया है, तो केवल उसी व्यक्ति को उत्तरदायी ठहराया जा सकता है, जिसने उस चेक पर हस्ताक्षर किए हैं। जस्टिस संदीप जैन की पीठ ने यह आदेश गाजियाबाद की मधु सिंह की याचिका पर दिया। मामला वर्ष 2006 में गाजियाबाद के कवि नगर थाने में दर्ज शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता हरिओम पाठक ने राहुल एवं मधु सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी और चेक बाउंस के आरोप लगाए थे। शिकायत के अनुसार, राहुल ने व्यापारिक मकसद के लिए कर्ज लिया था और उसके बदले में दो चेक जारी किए थे। खाते में पर्याप्त राशि न होने की वजह से बाउंस हो गए। ट्रायल कोर्ट ने मामले में याची को भी तलब किया था। इसी फैसले को याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। याची के वकील ने दलील दी कि चेक पर केवल राहुल के दस्तखत थे। याची सिर्फ संयुक्त खाताधारक थीं। उनका इस लेनदेन या चेक जारी करने में कोई भूमिका नहीं है। कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि चेक बाउंस के अपराध के लिए चेक पर हस्ताक्षर होना अनिवार्य है। हालांकि, आरोपी राहुल के खिलाफ मामला नियमानुसार जारी रखने का निर्देश दिया है। कंपनियों व साझेदारी फर्मों पर ही लागू हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रतिनिधिक दायित्व का सिद्धांत केवल कंपनियों और साझेदारी फर्मों पर लागू होता है, लोगों पर नहीं। याची ने चेक पर हस्ताक्षर नहीं किए थे और न ही उनके खिलाफ कोई विशिष्ट आपराधिक भूमिका साबित हुई थी। इस आधार पर कोर्ट ने गाजियाबाद की विशेष अदालत में लंबित कार्यवाही को रद्द कर दिया।
- Source: www.amarujala.com
- Published: May 13, 2026, 02:31 IST
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