अमर उजाला संवाद: घर से कर शुरुआत, हिंदी को रोजगार से जोड़ें, बुनियादी शिक्षा पर दें जोर

हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में रविवार को आयोजित अमर उजाला संवाद में हिंदी भाषा के जानकारों ने हिंदी की स्थिति, बदलते स्वरूप और भविष्य को लेकर विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि हिंदी का दायरा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसे रोजगार से जोड़ने और बुनियादी शिक्षा में मजबूत करने की जरूरत है। वक्ताओं ने कहा कि मातृभाषा पूजनीय है, बाकी भाषाएं सम्माननीय। हिंदी किसी भाषा की विरोधी नहीं, बल्कि दूसरी भाषाओं के शब्दों को भी अपने भीतर समेटकर आगे बढ़ने वाली भाषा है। अंग्रेजी का विरोध नहीं, हिंदी का अपमान स्वीकार नहीं एएमयू के हिंदी विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. शंभुनाथ तिवारी ने कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा है। मातृभाषा पूजनीय है, जबकि अन्य भाषाएं सम्माननीय हैं। हिंदी राजभाषा है और 14 सितंबर को सरकारी कार्यालयों, विश्वविद्यालयों और विदेशों में भारतीय दूतावासों में हिंदी दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी का विरोध नहीं है, लेकिन हिंदी का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता। हिंदी ऐसी भाषा है, जिसमें कई देशों की भाषाओं के शब्द शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भाषा बहता नीर है, जो समय के साथ आगे बढ़ती रहती है। सोशल मीडिया ने भी हिंदी के प्रसार को गति दी है। हालांकि, बुनियादी शिक्षा में हिंदी की पढ़ाई मजबूत होने से भाषा को और मजबूती मिलेगी। बुनियादी शिक्षा सुधरेगी तो हिंदी मजबूत होगी आगरा विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. रक्षपाल सिंह ने कहा कि वर्ष 1960 की हिंदी और आज की हिंदी में काफी बदलाव आया है। हिंदी के प्रति लोगों का स्नेह बना रहे, इसके लिए प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि सरकारों ने इस दिशा में पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। बुनियादी शिक्षा का स्तर सुधरने से हिंदी स्वत: मजबूत होगी, जिसका लाभ विद्यार्थियों को आगे की कक्षाओं में भी मिलेगा।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Sep 14, 2026, 14:30 IST
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