Bareilly News: बीडीए जबरन छीन रहा खेत, किसान बोले- जान दे देंगे पर जमीन नहीं
बरेली। बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) पीलीभीत बाइपास के किनारे नई टाउनशिप विकसित करने की तैयारी में है, लेकिन किसान जमीन देने के लिए सहमत नहीं हैं। 21 साल पहले चंदपुर, बिचपुरी व अन्य गांवों में बीडीए की ओर से किए गए अधिग्रहण से प्रभावित किसानों का हवाला देते हुए भू स्वामी प्राधिकरण पर विश्वास नहीं होने की बात कह रहे हैं। तीन दिन पहले अधिग्रहण के लिए सहमति लेने पहुंचे लेखपाल-कानूनगो के सामने किसानों ने बीडीए के विरुद्ध नारेबाजी भी की थी। इसकी वजह जानने के लिए बृहस्पतिवार को मामले की पड़ताल की गई तो किसान बीडीए के प्रति काफी उग्र दिखे। इस संबंध में पक्ष जानने के लिए बीडीए उपाध्यक्ष डॉ. मनिकंडन ए को कॉल की गई। उन्होंने कॉल रिसीव कर पूरी बात सुनी, फिर जवाब दिए बगैर कॉल डिस्कनेक्ट कर दी।बीडीए ने दबाव बनाया तो राजमार्ग पर लगाएंगे जामअहिलादपुरगांव को बीडीए ने नई टाउनशिप में शामिल किया है। लखनऊ-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग से सटा यह गांव एयरपोर्ट से करीब डेढ़ किमी दूर है। यहां की जमीन बेशकीमती है। खेती-किसानी बेहतर होने से गांव के घरों में रौनक दिखती है। यहां के किसान बीडीए को किसी भी कीमत पर जमीन देने के लिए तैयार नहीं हैं। सुबह 11 बजे 20-25 किसान ग्राम पंचायत के सचिवालय में बैठक कर बीडीए को जमीन न देने की योजना बना रहे थे। उन्होंने सामूहिक रूप से कहा, बीडीए ने चंदपुर, बिचपुरी व अन्य गांवों के किसानों को बहुत सताया है। जबरन जमीन ले ली। 21-22 साल हो गए, अब तक मुआवजा नहीं दिया। सैकड़ों किसान भूमिहीन होकर मजदूरी कर रहे हैं। अहिलादपुर के किसानों ने कहा, जान दे देंगे पर जमीन नहीं देंगे। जितना हो सकेगा, विरोध करेंगे। बीडीए यदि ज्यादा दबाव बनाएगा तो राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगाएंगे।जबरन जमीन लेने की फिराक में है प्राधिकरणशहर से सटा गांव कुम्हरा भी लखनऊ-दिल्ली हाईवे से सटा है। एयरपोर्ट से सिर्फ डेढ़ किमी दूर होने के कारण गांव की संपूर्ण जमीन बेशकीमती है। खेतों में फसलें लहलहा रही हैं। दोपहर एक बजे पंचायत भवन परिसर में ग्राम प्रधान अजीत सिंह व गांव के अन्य किसान मौजूद थे। ग्राम प्रधान ने बताया कि उनके गांव की जमीन बीडीए की नई टाउनशिप के दायरे में आ रही हैं। प्राधिकरण किसानों से जबरन जमीन लेने की फिराक में है। वर्ष 2019 में हमने अपनी कुछ जमीन को उप्र राजस्व संहिता की धारा-80 के तहत अकृषक घोषित कराया है, लेकिन बीडीए का कहना है कि जो जमीन वर्ष 2004 से पहले अकृषक घोषित हुई होगी, उसी का मुआवजा बढ़ी दरों पर दिया जाएगा। रूपराम ने कहा कि यदि बीडीए जबरन हमारी जमीन छीनने का प्रयास करेगा तो उसके लिए कानून है। गांव के सभी लोग मिलकर यह लड़ाई लड़ेंगे।बीडीए को जमीन देने का मतलब है बच्चों को कटोरा पकड़ानानई टाउनशिप के दायरे में आ रहा अड़ूपुरा जागीर गांव पीलीभीत मार्ग से एक किमी दूरी पर नहर किनारे है। सिंचाई के साधन अच्छे होने से यहां की जमीन बेहद उपजाऊ है। पड़ोस में एयरपोर्ट और बरेली महानगर होने से गांव की जमीन बहुमूल्य है। दोपहर ढाई बजे यहां प्राथमिक स्कूल के पास सड़क के किनारे 30-35 किसान बैठकर बीडीए से अपने खेत बचाने पर चर्चा कर रहे थे। किसानों ने बताया कि उनके गांव में दो दिन पहले लेखपाल आकर बीडीए का लाॅलीपॉप समझा रहे थे। हमने जमीन देने को मना कर दिया है। वर्ष 2005 में बीडीए ने चंदपुर, बिचपुरी के किसानों की जमीन ली थी, पर मुआवजा अब तक नहीं दिया। बीडीए को जमीन देने का मतलब है बच्चों के हाथ में कटोरा पकड़ाना। कहा, मुआवजा कुछ भी हो, हम किसी कीमत पर अपने खेत बीडीए को नहीं देंगे। प्रशासन ने जबरदस्ती की तो जान दे देंगे। संवादकिसानों के बीच विश्वास खो चुका है प्राधिकरणजमीन लेने के बाद बीडीए किसानों को समय से मुआवजा देगा, प्राधिकरण यह विश्वास खो चुका है। रामगंगानगर बसाने में उसने बिचपुरी जैसे कई गांवों के हजारों किसानों की जमीन ली और मुआवजा भी नहीं दिया। वह लोग कोर्ट-कचहरी के धक्के खा रहे हैं। इसलिए हमारे गांव के दो सौ किसान बीडीए को जमीन नहीं देंगे। - धनपाल सिंह, प्रधान, अड़ूपुरा जागीरदो दिन पहले बीडीए कार्यालय में हम लोगों को बुलाया गया था। वहां बात रखी है कि वह क्षेत्र के विकास में बाधा नहीं बनेंगे, लेकिन यदि बीडीए की तरफ से दिया जाने वाला मुआवजा उचित नहीं होगा तो हमारे गांव का कोई भी किसान किसी भी कीमत पर बीडीए को अपनी जमीन नहीं देगा। - अजीत सिंह, प्रधान, कुम्हरा---वर्जनप्रस्तावित नई टाउनशिप में किसानों के मामले पर बाद में बात करेंगे। अभी हम व्यस्त हैं। - वंदिता श्रीवास्तव, सचिव, बीडीए
- Source: www.amarujala.com
- Published: Aug 29, 2025, 06:06 IST
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