बिहार के महाकांड: जब जमीन की जंग में बहा दलितों का खून, इंदिरा की प्रचंड वापसी की राह बनी बेलछी की हाथी यात्रा

देश के लोकतंत्र पर लगा आपातकाल का धब्बा हट चुका था। नए सिरे से हुए चुनाव में विपक्षी दलों को मिलाकर बनी जनता पार्टी प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई। राज्यों की विधानसभा के लिए भी नए सिरे से चुनाव हुए। कुछ राज्यों को छोड़कर ज्यादातर राज्यों में भी जनता पार्टी को भारी सफलता मिली। जनता बेहद कौतूहल से नई सरकार की ओर देख रही थी। लेकिन, सत्ता में आने बाद इस दल के लिए कई चुनौतियां सामने आने लगीं। अलग-अलग विचारधारों को मिलाकर बने दल में यही अलग-अलग विचार टकराव की वजह बनने लगे। वहीं, दूसरी ओर देश के अलग-अलग हिस्सों में जातीय हिंसा की घटनाएं बढ़ने लगीं। ऐसी ही एक घटना बिहार के बेलछी में हुई। बेलछी की इस घटना ने 1977 के चुनाव की खलनायिका रहीं इंदिरा गांधी को दुनियाभर की मीडिया की सुर्खियां बना दिया। कुछ विशेषज्ञ तो यहां तक कहते हैं कि इस घटना ने इंदिरा की सत्ता वापसी में बहुत बड़ी भूमिका निभाई। आखिर बेलछी हत्याकांड क्या था, जिसने देश की राजनीतिक परिदृश्य को बदलने में अहम भूमिका निभाई आपातकाल के बाद इंदिरा गांधी की लगभग खत्म मानी जाने वाली राजनीति के लिए यह हत्याकांड कैसे राजनीतिक संजीवनी बन गया बिहार के महाकांड सीरीज की दूसरी कड़ी में आज इसी बेलछी हत्याकांड की की कहानी बिहार के महाकांड की पहली कड़ी यहां पढ़ें: दंगा जिसमें एक मुख्यमंत्री की कुर्सी गई, दंगाइयों ने खेत में गाड़कर 108 लाशों पर उगा दी थी गोभी

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 25, 2025, 20:14 IST
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