झारखंड: तीन साल से मुआवजे का इंतजार, कोर्ट ने जब्त कराई बिहार रोडवेज की बस
सड़क दुर्घटना में मृत व्यक्ति के आश्रितों को 1.15 करोड़ रुपये के मुआवजे का भुगतान न करने पर बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (बीएसआरटीसी) की एक बस जब्त कर ली गई। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी), रांची के आदेश के अनुपालन में सिविल कोर्ट की टीम ने यह कार्रवाई की है। जब्त की गई बस को रांची सिविल कोर्ट परिसर में खड़ा करा दिया गया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि जब तक निगम पूरी बकाया मुआवजा राशि और ब्याज का भुगतान नहीं कर देता, तब तक बस को नहीं छोड़ा जाएगा। डिपो में चार के बजाय मिली एक बस मुआवजा रकम की वसूली सुनिश्चित करने के उद्देश्य से न्यायाधिकरण ने निगम की चार बसों को जब्त करने का सख्त आदेश जारी किया था। इस अदालती आदेश का पालन कराने के लिए सिविल कोर्ट के नाजिर जीशान इकबाल और अधिवक्ता प्रदीप कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में शुक्रवार को टीम डिपो पहुंची। कार्रवाई के दौरान डिपो में न्यायाधिकरण के आदेश में शामिल चार बसों में से केवल एक बस उपलब्ध मिली। ऐसे में टीम ने उपलब्ध बस को जब्त कर अदालत परिसर पहुंचा दिया। 2023 से भुगतान का इंतजार कर रहा परिवार यह पूरी कानूनी लड़ाई विभूति प्रसाद सिंह की सड़क दुर्घटना में हुई असमय मृत्यु से जुड़ी हुई है। हादसे के बाद उनकी पत्नी मुन्नी देवी और तीन बच्चों ने मुआवजा प्राप्त करने के लिए वर्ष 2023 में न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाया था। सुनवाई पूरी होने पर वर्ष 2024 में एमएसीटी, रांची ने पीड़ित परिवार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीएसआरटीसी को 93,38,294 रुपये का मूल मुआवजा देने का आदेश जारी किया। इसके साथ ही अदालत ने 26 मई 2023 से वास्तविक भुगतान होने तक 7.5 प्रतिशत की दर से वार्षिक ब्याज चुकाने का निर्देश भी दिया था। उच्च न्यायालय ने भी खारिज की समीक्षा याचिका लंबा समय बीत जाने के बाद भी तय मुआवजा न मिलने पर परिजनों ने निष्पादन याचिका दायर कर निगम की संपत्ति कुर्क करने की मांग की। दूसरी ओर, निगम ने एकपक्षीय अवार्ड वापस लेने के लिए न्यायाधिकरण में आवेदन किया, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद निगम ने झारखंड उच्च न्यायालय में समीक्षा याचिका दायर की। उच्च न्यायालय में जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने 17 अप्रैल को समीक्षा याचिका खारिज कर दी। अदालत ने टिप्पणी की कि पूर्व फैसले में कोई त्रुटि नहीं है और यह याचिका न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Oct 30, 2026, 23:54 IST
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