Prayagraj : घर की चौखट पर बहाया जा रहा विश्वास का लहू, कहीं भाई तो कहीं पुत्र बना कातिल

जिले में बढ़ते अपराध के बीच एक चिंताजनक तथ्य सामने आया है। पिछले छह माह में हुईं 27 हत्याओं में से 17 मामलों में हत्यारोपी कोई बाहरी नहीं, बल्कि परिवार और रिश्तेदारी से जुड़े लोग ही निकले। कहीं संपत्ति विवाद में भाई ने जान ले ली। कहीं पति-पत्नी, पिता-पुत्र और अन्य पारिवारिक रिश्तों के बीच उपजे विवाद खूनी संघर्ष में बदल गए। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, दिसंबर 2025 से 13 जून 2026 तक जिले में हत्या की 27 वारदात दर्ज की गईं। इनमें अधिकतर मामलों की जांच में घरेलू कलह, पारिवारिक विवाद, अवैध संबंधों को लेकर तनाव, संपत्ति बंटवारा और आपसी रंजिश हत्या की मुख्य वजह बनकर सामने आई है। हाल ही में साउथ मलाका में कारोबारी वीरेंद्र कुमार वैश्य के परिवार के चार लोगों की हत्या ने पूरे जिले को झकझोर दिया। इसमें तीन हत्याओं का आरोप परिवार के बेटे पर है। इसके बाद कर्नलगंज में बेटे ने सिर्फ इस बात पर पिता रामदुलारे कोरी की हत्या कर दी कि भरण-पोषण नहीं देना पड़ेगा। भावनाओं से ओतप्रोत ऐसे रिश्तों के कत्ल की मानसिकता के पीछे उपजे सवालों के जवाब खोज पाना समाजशास्त्रियों के लिए भी चुनौतीपूर्ण हो रहा है। पुलिस अफसरों का कहना है कि अधिकतर मामलों में आरोपी पीड़ित के करीबी रिश्तेदार या परिचित रहे हैं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 15, 2026, 14:17 IST
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