UK: रूसी अधिकारियों के साथ काम करने वाले किसी भी व्यक्ति को कराना होगा पंजीकरण, नहीं तो होगी पांच साल की सजा

ब्रिटेन सरकार ने रूस को अपनी सुरक्षा योजना में सबसे ऊपर रखा है, जिसका मकसद देश को विदेशी प्रभाव से बचाना है। गृह मंत्री डैन जार्विस ने मंगलवार को संसद में कहा कि कोई भी व्यक्ति या कंपनी जो रूस के सरकारी संस्थानों, सेना, खुफिया सेवाओं या संसद के साथ कोई गतिविधित करती है, तो उसे एक जुलाई से विदेशी प्रभाव पंजीकरण योजना (एफआईआरएस) में पंजीकरण कराना होगा, नहीं तो पांच साल तक की सजा हो सकती है। यूनाइटेड रशिया जैसी रूस की राजनीतिक पार्टियों को भी ब्रिटेन में कोई गतिविधि शुरूकरने से पहले यह पंजीकरण कराना होगा। ब्रिटेन की सरकार ने कहा कि यह पहल देश की सुरक्षा को खतरे में डालने वाली गतिविधियों का पता लगाने और उन्हें रोकने का एक महत्वपूर्ण उपकरण है। गृह सचिव यवेटकूपर ने कहा, लंबे समय से क्रेमलिन हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अस्वीकार्य खतरों के लिए जिम्मेदार रहा है। नए उपायों से रूस के लिए भविष्य में हमारे खिलाफ शत्रुतापूर्ण कार्य करना कठिन हो जाएगा। ये भी पढ़ें:पांच अप्रैल से पहले हो जाएगी डील; अमेरिका में टिकटॉक पर बैन की आशंका के बीच राष्ट्रपतिट्रंप गृह मंत्री डैन जार्विस ने हाल के वर्षों में रूस की गतिविधियों का हवाला दिया, जिसमें 2018 में रूस के एक पूर्व जासूस औऱ उसकी बेटी को जहर देने के लिए नर्व एजेंट नोविचोक (तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करने वाला रासायनिक पदार्थ) का उपयोग, साइबर हमले और अन्य जासूसी तरीकों के जरिए ब्रिटिश संसद के सदस्यों को निशाना बनाना शामिल है।उन्होंने आगे कहा, यूक्रेन पर रूस का अवैध आक्रमण साफतौर पर इस बात को उजागर करता है कि इसका मकसद यूरोप और वैश्विक सुरक्षा को कमजोर करना है। ब्रिटेन ने 2018 से अब तक रूस के 20 से अधिक खुफिया अधिकारियों और कई रूसी राजनयिकों को यह कहते हुए निष्कासित किया है कि ब्रिटिश राजनयिकों को परेशान किया गया। पिछले महीने ब्रिटेन स्थित बुल्गारिया के तीन नागरिकों को रूस के लिए जासूसी करने के आरोप में दोषी ठहाया गया। पुलिस ने इसे औद्योगिक पैमाने पर जासूसी बताया था। इससे पहले ईरान को इस कार्यक्रम के तहत सूचीबद्ध किया गया था। सांसद कई महीनों से सवाल उठा रहे हैं कि चीन को इसमें क्यों शामिल नहीं किया गया। विपक्षी लेबर पार्टी के क्रिस फ्लिप ने कहा, मुझे इसके कोई शक नहीं है कि चीन को इस कार्यक्रम में उच्च स्तर पर शामिल किया जाना चाहिए। हमें पता है कि चीन औद्योगिक स्तर पर जासूसी करता है, सरकारी तकनीक, विश्वविद्यालयों व उद्योगों से तकनीक चुराने की कोशिश करता है। वे हमारी राजनीतिक प्रणाली में घुसपैठ की कोशिश करते हैं। संबंधित वीडियो-

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Apr 02, 2025, 04:24 IST
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