Chaitra Navratri 2025: जानिए चैत्र नवरात्रि में पूजन सामग्री का आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व

देवी भागवत पुराण के अनुसार चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना अत्यंत फलदायी मानी जाती है। यह पर्व भक्तों को शक्ति, ज्ञान और समृद्धि प्रदान करता है। नौ दिनों तक माता के शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री स्वरूपों की पूजा की जाती है। भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक नवरात्रि का पालन करते हैं, उन्हें विजय, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। इस दौरान विभिन्न पूजन सामग्रियों का प्रयोग किया जाता है, जिनका आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व होता है। 1. कलश स्थापना कलश को ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इसमें जल भरकर आम के पत्ते, सुपारी, पंचरत्न और नारियल रखा जाता है। आम के पत्ते सकारात्मक ऊर्जा, सुपारी मंगल कार्यों की सफलता, पंचरत्न पंचतत्वों और नारियल शुभता का प्रतीक होता है। इससे घर में शांति और समृद्धि बनी रहती है। 2. माता का आसन मां के आसन के लिए लाल या पीला कपड़ा प्रयोग किया जाता है। लाल रंग शक्ति और विजय तो पीला रंग शुभता और ज्ञान का प्रतीक है। उचित आसन से पूजा में स्थायित्व और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। 3. अक्षत (चावल) अक्षत अर्थात अखंडित चावल, संपूर्णता और समृद्धि का प्रतीक है। देवी को हल्दी से रंगे चावल अर्पित करने से शुभ फल प्राप्त होता है। Chaitra Navratri 2025:इस नवरात्रि राशि के अनुसार करें उपाय, घर में बरकत से लेकर व्यापार में होगा लाभ 4. कुमकुम और हल्दी कुमकुम सौभाग्य और शक्ति तो हल्दी स्वास्थ्य और पवित्रता का प्रतीक है। माँ को कुमकुम अर्पित करने से सौभाग्य और सुख-शांति आती है। 5. पूजन के पुष्प फूल माँ को अत्यंत प्रिय हैं। गुड़हल शक्ति का प्रतीक है, जबकि कमल और गुलाब धन-समृद्धि के लिए उपयोग किए जाते हैं। गेंदा फूल शुभता का प्रतीक माना जाता है। देवी को अर्पित किए जाने वाले फूलों से पूजा स्थल की आध्यात्मिक ऊर्जा जागृत होती है और वातावरण पवित्र रहता है। 6. नारियल (श्रीफल) नारियल को श्रीफल कहा जाता है, जो मनुष्य के अहंकार का प्रतीक है। इसे देवी को अर्पित करने से उन्नति और सुख-शांति मिलती है। Chaitra Navratri 2025:चैत्र नवरात्रि के पहले दिन इस विधि से करें देवी की पूजा, मिलेगी विशेष कृपा 7. अखंड दीपक नवरात्रि में गाय के घी का अखंड दीपक जलाना अत्यंत शुभ होता है। इससे घर में पवित्रता बनी रहती है और देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। 8. कपूर और धूप कपूर जलाने से नकारात्मकता दूर होती है और वातावरण शुद्ध होता है। धूप से पूजा में एकाग्रता आती है। 9. हवन सामग्री नवरात्रि में हवन करने का विशेष महत्व होता है। इसमें विशेष जड़ी-बूटियाँ, गुग्गुल, लोबान, चंदन और अन्य पवित्र पदार्थों का प्रयोग किया जाता है। हवन से वातावरण शुद्ध होता है, नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और देवी की कृपा प्राप्त होती है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 29, 2025, 18:06 IST
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