बच्चा तस्कर गिरोह पकड़ा : 5-10 लाख रुपये में बेचते थे, अस्पताल संचालिका समेत 13 दबोचे; कई राज्यों में फैले तार

पुलिस ने नवजात बच्चों की तस्करी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश कर दिल्ली के निजी अस्पताल की संचालिका समेत 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से पांच नवजातों को बरामद कर आश्रय गृह भेजा गया है। जांच में सामने आया कि गिरोह डेढ़ साल में विभिन्न राज्यों में 30 बच्चों को बेच चुका है। आरोपी राजस्थान और गुजरात के गरीब परिवारों को लालच देकर महज 10 से 15 हजार रुपये में उनके बच्चे खरीद कर बेऔलाद दंपतियों को 5 से 10 लाख रुपये में बेचते थे। गिरोह के तार दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात से जुड़े हैं। दिल्ली मध्य जिला के पुलिस उपायुक्त रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि जून के पहले सप्ताह में पहाड़गंज से सूचना मिली थी कि एक महिला अलग-अलग बच्चों के साथ दिख रही है। पुलिस ने नकली ग्राहक बनाकर महिला के पास भेजा। सौदा तय होने और 20 हजार रुपये की टोकन मनी देने के बाद पांच जून को जैसे ही आरोपियों ने नकली ग्राहक को 4-5 दिन का नवजात सौंपा, पुलिस ने ज्योति उर्फ कमलेश को दबोच लिया। उसी दिन उसकी साथी शालू और ललित को भी गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में पता चला कि गिरोह के तार बेगमपुर, रोहिणी स्थित हीरा मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल से जुड़े हैं। इसके बाद पुलिस ने छापा मारकर अस्पताल की संचालिका डॉ. विवेकी (47) को भी गिरफ्तार कर लिया। पानीपत से तीन और ग्वालियर से दो खरीदार दबोचे गिरफ्तार आरोपियों में ओमवती (45) और बच्चे खरीदने वाले पांच लोग शामिल हैं। पुलिस ने ग्वालियर में छापा मारकर मुकेश और रीमा पाल को गिरफ्तार किया, जिन्होंने 9 लाख रुपये में एक लड़का और लड़की खरीदे थे। पानीपत से सन्नी अरोड़ा, रितु अरोड़ा और सारिका को गिरफ्तार किया है। अन्य आरोपियों की तलाश में राजस्थान और मध्य प्रदेश में छापे मारे जा रहे हैं। पुलिस ने बेचे गए दो और नवजातों का पाली और मध्य प्रदेश में पता लगाया है, जहां टीम भेजी गई है। गुजरात और पाली से बच्चों को लाया जाता था दिल्ली गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर बच्चों का सौदा कराने वाली लैब टेक्निशियन प्रतिभा (34) और कार चालक विपिन (33) को भी दबोचा गया। गिरोह की मास्टरमाइंड डॉ. विवेकी और राजस्थान के उदयपुर निवासी साएबा भाई घमर उर्फ कालिया है। साएबा गुजरात और पाली से बच्चों का इंतजाम करता था, जिन्हें विपिन कार से दिल्ली लाता था। अस्पताल में ही बच्चों के फर्जी जन्म प्रमाण पत्र और दूसरे कागजात बनवाए जाते थे। गिरोह लड़कियों को 4 से 5 लाख और लड़कों को 8 से 10 लाख रुपये में बेचता था। जैविक माता-पिता को सौंपे जाएंगे बरामद पांच नवजाताें में संभवत: चार आदिवासी हैं, जबकि एक दिल्ली का है। बच्चों की उम्र 27 दिन से लेकर चार महीने तक है। पुलिस के अनुसार, इन बच्चों के असली माता-पिता की खोज जारी है। जैविक माता-पिता की पहचान के बाद नवजात उन्हें सौंप दिए जाएंगे। पुलिस ने तस्कर गिरोह से 2.92 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। इस राशि से गिरोह एक नवजात को खरीदने वाला था।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 19, 2026, 02:52 IST
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