Clean Ganga Mission: काली नदी में फिर उतरेगी केंद्रीय टीम, गंगा में मिल रहा दूषित पानी; जल-जीवों पर भी संकट
नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के तहत काली नदी के प्रदूषण की जांच के लिए हाल ही में केंद्रीय टीम ने सर्वे किया है। इसकी रिपोर्ट भेज दी गई है। अब टीम दोबारा दौरा करेगी और नदी में छोड़े जा रहे दूषित व अशोधित जल की जांच कर कार्रवाई की जाएगी। डिस्ट्रिक्ट मिशन फॉर क्लीन गंगा के जिला परियोजना अधिकारी आलोक कुमार ने बताया कि नदी की ऊपरी सतह का पानी अधिक प्रदूषित मिला है। यही गंदा पानी आगे कन्नौज में गंगा नदी में मिलकर प्रदूषण बढ़ा रहा है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की 23 मार्च को कराई गई जांच में सामने आया कि नदी के पानी में घुलित ऑक्सीजन (डीओ) का स्तर मात्र 2.1 मिग्रा प्रति लीटर है। इतनी कम ऑक्सीजन में मछलियों और अन्य जलीय जीवों का जीवित रहना मुश्किल हो जाता है। नदी में अब मछलियां बहुत कम दिखाई देती हैं। मानकों के अनुसार जलीय जीवों के लिए पानी में कम से कम 4 से 5 मिग्रा प्रति लीटर ऑक्सीजन जरूरी होती है, जबकि 2 मिग्रा प्रति लीटर से नीचे का स्तर खतरनाक माना जाता है। नदी में टोटल डिसॉल्व्ड सॉलिड (टीडीएस) की मात्रा 915 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज की गई, जबकि सामान्य स्तर 300 से 500 मिलीग्राम प्रति लीटर होना चाहिए। इसके चलते नदी का पानी ई श्रेणी में पहुंच गया है, यानी इसका उपयोग केवल सिंचाई और औद्योगिक कार्यों में ही किया जा सकता है। बॉक्स : 460 किमी लंबी है काली नदी काली नदी (पूर्वी) मुजफ्फरनगर जिले के अंतवाड़ा गांव से निकलती है। इसके बाद यह मेरठ, बुलंदशहर, अलीगढ़, एटा और फर्रुखाबाद से होकर कन्नौज के पास गंगा नदी में मिलती है। इसकी कुल लंबाई करीब 460 किलोमीटर है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की प्रमुख जलधारा मानी जाने वाली यह नदी इस समय गंभीर प्रदूषण से जूझ रही है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 26, 2026, 01:08 IST
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