मणिकर्णिका घाट विवाद: रानी अहित्याबाई होल्कर की मूर्तियां तोड़े जाने पर सियासत तेज, घाट पर पहुंचे कई दिग्गज
मणिकर्णिका घाट पर बुलडोजर कार्रवाई का वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। इसे लेकर किए जा रहे विरोध ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। इस मुद्दे पर इंदौर से काशी तक विरोध जताई जा रही है। रानी अहिल्याबाई होल्कर से जुड़े धार्मिक स्थलों और कलाकृतियों को नुकसान पहुंचाने के आरोपों के बीच शुक्रवार को मेयर अशोक तिवारी, नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल व विधायक नीलकंठ तिवारी मणिकर्णिका घाट पहुंचे। स्थानीय पंडा समाज के लोगोंऔर अन्य लोगों से बातचीत करने के लिए विधायक, मेयर और नगर आयुक्त पहुंचे हैं। स्थानीय लोगों द्वारामंदिरो को संरक्षित करने की मांग की जा रही है। अस्सी घाट पहुंचीं सपा महिला सभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष जूही सिंह सपा महिला सभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष जूही सिंह काशी में हो रहे बुलडोजर कार्रवाई को लेकर भड़क गईं। उन्होंने कहा कि रानी अहिल्याबाई का मंदिर, दालमंडी तोड़ा जा रहा है। यह कैसा विकास है। यह उत्तर प्रदेश की संस्कृति है इसे हम लेकर रहेंगे। उन्होंने एसआईआर को लेकर कहा कि इसमें भारतीय नागरिकों के अधिकार का हनन हो रहा है। मायावती द्वारा अकेले विधानसभा चुनाव लड़ने पर जूही सिंह ने कहा कि मायावती का बीजेपी से गठबंधन टूट गया है क्या उधर, कांग्रेस पार्टी भी खुलकर मैदान में उतर आई है। शुक्रवार को कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि वाराणसी में विकास के नाम पर लगातार सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों को नष्ट किया जा रहा है। कांग्रेस महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने कहा कि प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में पहले काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के नाम पर सैकड़ों मंदिरों को तोड़ा गया, फिर स्वतंत्रता संग्राम की विरासत से जुड़े सर्वसेवा संघ आश्रम को उजाड़ा गया। अब दालमंडी क्षेत्र, जहां लगभग 10 हजार लोगों की आजीविका जुड़ी है, वहां भी तोड़फोड़ की जा रही है। इसके बाद अब मणिकर्णिका घाट पर मां अहिल्याबाई होल्कर द्वारा निर्मित धार्मिक स्थलों, मूर्तियों और कलाकृतियों को क्षति पहुंचाने के आरोप सामने आए हैं। कांग्रेस ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की सच्चाई जनता के सामने लाई जाए। इसके लिए एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल द्वारा स्थल निरीक्षण की मांग की गई है, जिसमें जिला प्रशासन, स्थानीय नागरिक और कांग्रेस प्रतिनिधि शामिल हों। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो अनशन और फिर आमरण अनशन शुरू करने को बाध्य होंगे। प्रदेश प्रवक्ता संजीव सिंह ने कहा कि प्रशासन को चाहिए कि वह पारदर्शिता के साथ पूरे मामले की जांच करें। यदि हमारी धरोहर सुरक्षित नहीं की गई तो कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी, आंदोलन और तेज किया जाएगा।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jan 16, 2026, 14:03 IST
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