Maharashtra: पंढरपुर मंदिर समिति से कोर्ट का झटका, अदालत ने विट्ठल मूर्ति पर रासायनिक लेप लगाने से रोका

महाराष्ट्र के सोलापुर की एक अदालत ने पंढरपुर मंदिर समिति को फिलहाल भगवान विट्ठल की मूर्ति पर रासायनिक सुरक्षा परत (केमिकल कोटिंग) लगाने से रोक दिया है। अदालत ने कहा कि धार्मिक भावनाओं और परंपराओं का सम्मान करना जरूरी है।यह आदेश अस्थायी रूप से जारी किया गया है। याचिका में क्या कहा गया है संयुक्त सिविल जज एसएस राउल ने सोमवार को महाराष्ट्र मंदिर महासंघ और वारकरी समूहों (भगवान विट्ठल के भक्तों) के सदस्यों द्वारा श्री विट्ठल रुक्मिणी मंदिर समिति के खिलाफ दायर एक आवेदन पर अंतरिम आदेश पारित किया, जिसने मंगलवार और बुधवार को मूर्ति पर लेप का काम निर्धारित किया था। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि एपॉक्सी रेजिन जैसे आधुनिक रसायनों का प्रयोग शास्त्रों का उल्लंघन करता है। यह प्राचीन देवता को अपवित्र करता है। इसके बजाय उन्होंने पारंपरिक प्राकृतिक वज्रलेप की वकालत की। 'मूर्ति सभी भक्तों की है' मंदिर समिति ने इसके जवाब में कहा कि जुलाई में आषाढ़ी एकादशी तीर्थयात्रा से पहले पुरातत्व विभाग द्वारा जीर्णोद्धार की सिफारिश की गई थी ताकि आगे की टूट-फूट को रोका जा सके। वहीं, पंढरपुर मंदिर अधिनियम के तहत याचिकाकर्ताओं के अधिकार पर सवाल उठाया। समिति के तर्कों को खारिज करते हुए न्यायाधीश ने कहा कि प्रशासनिक समिति केवल संरक्षक के रूप में कार्य कर रही है।मंदिर के सुचारू संचालन में सहायता करती है। उन्होंने आगे कहा 'वे मूर्ति पर किसी भी प्रकार का स्वामित्व या संप्रभुता का दावा नहीं कर सकते। मूर्ति सभी भक्तों की है और इसलिए, मूर्ति को प्रभावित करने वाला कोई भी कार्य सभी भक्तों की प्राथमिक चिंता का विषय है। अदालत ने आगे क्या कहा अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की एक रिपोर्ट में मूर्ति को अच्छी स्थिति में संरक्षित पाया गया है। इसममेंकहा कि भक्तों की आपत्तियों को नजरअंदाज करने की कोई तत्काल आवश्यकता नहीं है। न्यायाधीश ने कहा, 'जब तक प्रतिवादी द्वारा सुरक्षात्मक परत चढ़ाने के लिए इस्तेमाल की गई सामग्रियों के संबंध में कोई विशिष्ट स्पष्टीकरण नहीं दिया जाता, जो कि अभी केविवाद का मुख्य विषय है, तब तक ऐसी सुरक्षात्मक परत चढ़ाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।' अदालत ने कहा कि पारंपरिक नियमों से विचलन से मूर्ति का ही अपमानहोगा। वहीं, मुकदमे के अंतिम निपटारे तक समिति को प्रक्रिया संचालित करने से अस्थायी रूप से रोक दिया। महाराष्ट्र मंदिर महासंघ ने सोमवार को एक विज्ञप्ति में दावा किया कि कृत्रिम रसायन पत्थर की प्राकृतिक श्वसन प्रक्रिया में बाधा डालते हैं। मूर्तियों को भंगुर बना सकते हैं। जिससे पारंपरिक अनुष्ठानों का उल्लंघन होता है। हर साल, किसान, मजदूर और कृषि श्रमिकों सहित समाज के सभी वर्गों से लाखों वारकरी सोलापुर जिले के पंढरपुर में पैदल तीर्थयात्रा करते हैं। वे आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर शहर के प्रसिद्ध विट्ठल-रुक्मिणी मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 23, 2026, 07:18 IST
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