खतरनाक मोड़: पश्चिम एशिया में शक्ति प्रदर्शन की होड़, हो रहा पूरी दुनिया का नुकसान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 48 घंटों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खोलने और ऐसा न करने पर ईरान के बिजली संयंत्रों को नष्ट करने की चेतावनी को खारिज करते हुए तेहरान ने जिस तरह से इस्राइल पर मिसाइल हमलों का नया दौर शुरू किया है, उससे पश्चिम एशिया संघर्ष एक नए खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। ईरान के बिजली संयंत्रों को नेस्तनाबूद करने की अमेरिकी धमकी निस्संदेह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों की कसौटी पर गंभीर सवाल खड़े करती है। ऊर्जा संयंत्रों पर हमले सीधे तौर पर आम नागरिकों को प्रभावित करेंगे, जिससे बिजली, पानी, अस्पताल और संचार व्यवस्था इत्यादि सबकुछ ठप हो सकता है। दूसरी तरफ, ईरान जो कर रहा है, वह भी कोई कम चिंताजनक नहीं है। होर्मुज को बाधित कर उसने पूरी दुनिया को ऊर्जा संकट में तो डाला ही है, इस्राइल के ऊर्जा स्रोतों और खाड़ी देशों पर हमला करके क्षेत्रीय युद्ध के वैश्विक संकट में तब्दील होने की आशंकाएं भी पैदा कर दी हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता और कई सैन्य प्रमुखों के मारे जाने के बावजूद अमेरिकी चेतावनी पर ईरान की इस टिप्पणी से उसके तेवरों की ही झलक मिलती है कि अगर तेहरान के ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बनाया गया, तो इसका खामियाजा पूरे पश्चिम एशियाई क्षेत्र के महत्वपूर्ण ऊर्जा संयंत्रों को भुगतना पड़ेगा। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चिंताजनक पहलू है, कूटनीति का हाशिये पर चले जाना। नाटो सहयोगियों की अनिच्छा, वैश्विक शक्तियों के बीच मतभेद और संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं का तकरीबन गैरमौजूद दिखना दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था इस संकट से निपटने में किस कदर लाचार महसूस कर रही है। भारत के लिए यह स्थिति खास तौर पर संवेदनशील है। होर्मुज में किसी भी किस्म की बाधा सीधे तौर पर देश में महंगाई और आपूर्ति शृंखलाओं को प्रभावित कर सकती है और ऐसा होता दिख भी रहा है। देश में जारी गैस संकट के मद्देनजर केंद्र सरकार ने राज्यों को एलपीजी आपूर्ति बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन सिलिंडरों की कालाबाजारी के बदस्तूर जारी रहने और महंगाई के बढ़ने से पश्चिम एशियाई संकट की आंच अब आम आदमी के घर तक पहुंच रही है, जो चिंताजनक है। अब राष्ट्रपति ट्रंप भी इस युद्ध से बाहर निकलने की इच्छा जता रहे हैं, तो निश्चित ही उन्हें समझ लेना चाहिए कि सैन्य दबाव से हर संकट का समाधान नहीं हो सकता। अमेरिका व ईरान, दोनों को ही समझना होगा कि शक्ति प्रदर्शन की इस होड़ में अंतत: नुकसान पूरी दुनिया को उठाना पड़ रहा है। इसलिए यह समय है कि चेतावनी की भाषा छोड़कर संवाद की राह अपनाई जाए, वरना तो यह युद्ध फिलहाल थमने से रहा।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 23, 2026, 05:15 IST
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