दिल्ली विधानसभा का बजट सत्र समाप्त : कैग रिपोर्ट पर भाजपा विधायकों ने आप सरकार को घेरा, कई मामलों में आरोप
कैग रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान भाजपा विधायक ओपी शर्मा ने पूर्व आप सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने वायु प्रदूषण मापने के लिए जितने भी उपकरण इस्तेमाल किए सभी नकली थे। प्रदूषण मापने का कोई भी विश्वसनीय पैमाना इस्तेमाल नहीं किया गया। दिल्ली में बसों के अभाव में नकली फिटनेस सर्टिफिकेट देकर बसें चलाई गईं। दिल्ली की सीमाओं पर आईएसबीटी बनने थे, जो नहीं बने। नई बसें खरीदने के नाम पर लगातार भ्रष्टाचार किया गया। ईवी पॉलिसी को पिछली सरकार ने नकार दिया। वायु गुणवत्ता के नाम पर दिल्ली वासियों को गुमराह किया। वहीं, विधायक अनिल महावर ने कहा कि दिल्ली देश की राजधानी है, इसलिए प्रदूषण के कारण दुनिया के सामने शर्मिंदा होना पड़ता है। पूर्व आप सरकार ने हाईकोर्ट की फटकार के बाद कनाट प्लेस में 23 करोड़ रुपये लगाकर स्मॉग टावर बनाया जो काम ही नहीं कर रहा। दिल्ली में जब भी प्रदूषण का स्तर बढ़ता था तो ये पंजाब का नाम लेकर चिल्लाते थे, लेकिन पंजाब में आप सरकार बनने पर पलट गए और पराली जलाने का इल्जाम हरियाणा पर मढ़ने लगे। दिल्ली में पराली गलाने के लिए 40 लाख रुपये खर्च कर दवा बनाई और 15 करोड़ रुपये इसके विज्ञापन पर खर्च कर दिए। इधर, तरविंदर सिंह मारवाह ने कहा केजरीवाल ने लोगों की जान दांव पर लगा दी। वे हमेशा यही कहते रहे कि धुंआ पंजाब से आता है, लेकिन दो साल से एक बार नहीं कहा कि धुंआ कहां से आ रहा है। धुएं की तलवार हरियाणा की ओर मोड़ दी। ये बड़ी शर्म की बात है कि पिछली सरकार के दौरान 11 साल में एक बार भी कैग रिपोर्ट सदन में नहीं आई, लेकिन काले कारनामे बाहर आ रहे हैं। वाहन प्रदूषण के लिए पूर्व आप सरकार जिम्मेदार : विजेंद्र गुप्ता विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने वायु प्रदूषण के मामले में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट पर पूर्व आप सरकार पर निशाना साधा। कैग रिपोर्ट पर चर्चा के बाद कार्रवाई के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि आप सरकार दिल्ली में वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में पूरी तरह विफल रही। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से यह बताया गया है कि वाहन प्रदूषण की रोकथाम और शमन पूरी तरह से सरकार के नियंत्रण में था, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। विजेंद्र गुप्ता ने कैग रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि आप सरकार के पास वायु गुणवत्ता की निगरानी प्रणाली के लिए कोई प्रभावी तंत्र नहीं था। सरकार सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को बेहतर करने में असफल रही और डीटीसी बसों की संख्या बढ़ाने के बावजूद उन्हें सड़कों पर नहीं उतारा गया। बजट प्रावधान होने के बावजूद मोनोरेल, लाइट रेल ट्रांजिट और इलेक्ट्रॉनिक ट्रॉली बस जैसी वैकल्पिक परिवहन व्यवस्थाओं पर कोई काम नहीं किया गया। प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं थीं। प्रदूषण जांच केंद्रों का निरीक्षण नहीं किया गया, जिससे हजारों वाहनों को बिना उचित जांच के प्रमाणपत्र मिलते रहे। वर्ष 2018-19 में 64 प्रतिशत वाहनों को फिटनेस करानी थी, लेकिन अधिकांश ने फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं लिया। ऑड-ईवन योजना, ट्रकों पर प्रतिबंध और ई-वाहनों को बढ़ावा देने जैसी योजनाओं को सही तरीके से लागू नहीं किया गया। उन्होंने लोक लेखा समिति को कैग रिपोर्ट की गहन जांच करने और अधिकारियों व नेताओं की पहचान करने का निर्देश दिया, जिन्होंने अपने कर्तव्यों का पालन नहीं किया। उन्होंने कहा कि समिति को तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी और संबंधित विभागों को एक महीने के भीतर अपने एक्शन टेकन नोट पेश करनी होगी। वर्ष 2026 तक दिल्ली की सड़कों पर दौड़ेंगी 11,000 बसें : मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को विधानसभा में कैग रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान वायु प्रदूषण की रोकथाम और सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ करने के लिए योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार 2026 तक दिल्ली की सड़कों पर 11,000 बसें उतारने के लिए प्रतिबद्ध है। वर्तमान में दिल्ली में 6,484 बसें संचालित हो रही हैं, जबकि जरूरत 11,000 बसों की है। सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के लिए रूट रेशनलाइजेशन की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, ताकि बस सेवा पूरे शहर में प्रभावी रूप से उपलब्ध हो सके। ई-बसों की संख्या बढ़ाने के लिए चार्जिंग स्टेशनों और डिपो का विस्तार किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए कई अहम कदम उठाए जाएंगे। इस साल 70 लाख नए पौधे लगाए जाएंगे, ताकि हरित क्षेत्र को बढ़ाया जा सके। इसके अलावा 1000 वाटर स्प्रिंक्लिंग मशीनें पूरे साल के लिए तैनात की जाएंगी, ताकि सड़कों पर धूल को नियंत्रित किया जा सके। राजधानी में वायु गुणवत्ता की निगरानी के लिए छह नए एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इससे प्रदूषण स्तर की सही जानकारी मिलेगी और उसके अनुसार कदम उठाए जाएंगे। सरकार ई-कचरे के वैज्ञानिक निपटान के लिए नया इको पार्क स्थापित करेगी। ट्रैफिक निगरानी और सुरक्षा बढ़ाने के लिए 500 नए कैमरे प्रमुख ट्रैफिक जंक्शनों पर लगेंगे, जो नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की पहचान करेंगे। इसके अलावा एक इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किया जाएगा, जो वायु गुणवत्ता, कचरा प्रबंधन और स्वच्छता व्यवस्था की निगरानी करेगा। मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार पर संसाधनों के दुरुपयोग और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने नीतियों और निगरानी व्यवस्था को कमजोर कर दिया, जिससे दिल्ली की वायु गुणवत्ता खराब होती चली गई। राजधानी में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए दस साल से अधिक पुराने डीजल वाहनों और 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाएगा। दिल्ली सरकार मेट्रो के चौथे और पांचवें चरण के विस्तार पर तेजी से काम कर रही है, जिसके लिए बजट में 3000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे सार्वजनिक परिवहन को और अधिक सुगम बनाया जाएगा और लोग निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करेंगे। दिल्ली को स्वच्छ और हरित बनाने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। सरकार की सभी योजनाएं केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा, ताकि राजधानी को प्रदूषण मुक्त और आधुनिक बनाया जा सके। बजट सत्र का समापन, बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बजट सत्र के समापन की घोषणा करते हुए बताया कि सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। इस संबंध में वे उपराज्यपाल वीके सक्सेना को सूचना देंगे। बजट सत्र 24 मार्च को शुरू हुआ था। इस दौरान नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की छह रिपोर्ट भी सदन में प्रस्तुत हुईं। सत्र के दौरान कई मुद्दों पर विपक्ष और सरकार के बीच तीखी बहस भी हुई। दिल्ली के विकास, बजट आवंटन और विभिन्न योजनाओं को लेकर सदन में चर्चा हुई।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 03, 2025, 06:54 IST
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