Delhi SIR: उजड़े घर और उलझे वोट, पुनर्वास के बाद एसआईआर में फंसे हजारों परिवार; अधूरी जानकारी से बढ़ी परेशानी

राजधानी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद पुनर्वास कॉलोनियों में बसाए गए सैकड़ों परिवार अब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान नई परेशानी का सामना कर रहे हैं। जिन लोगों के घर जून में ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान टूट गए, उन्हें समझ नहीं आ रहा कि मतदाता सूची के लिए गणना फॉर्म पुराने पते से भरें या नए पते से। बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) के अलग-अलग निर्देश और स्पष्ट जानकारी के अभाव ने उनकी दिक्कत और बढ़ा दी है। 14 जून को भाई राम कैंप, डीआईडी कैंप और मस्जिद कैंप में ध्वस्तीकरण अभियान चलाया गया था। इसके बाद पात्र परिवारों को दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (डूसिब) की सावदा घेवरा पुनर्वास कॉलोनी में आवास आवंटित किए गए। इसी बीच 30 जून से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू हो गई। ऐसे में विस्थापित परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनका निर्वाचन संबंधी रिकॉर्ड किस पते के आधार पर अपडेट होगा। पुनर्वास कॉलोनी में रहने वाले कई लोगों का कहना है कि उन्हें पुराने इलाके में जाकर ही फॉर्म लेने और जमा करने की सलाह दी गई, जबकि वहां अब उनके मकान ही नहीं हैं। बीएलओ का कहना है कि जिन परिवारों का पुनर्वास हो चुका है, उन्हें पुराने क्षेत्र में एसआईआर फॉर्म नहीं दिया जा रहा है। ऐसे मतदाताओं को नए पते पर नाम स्थानांतरित कराने के लिए फॉर्म-8 भरना होगा। पता सत्यापन के बाद उनका नाम स्वत नए मतदान केंद्र पर स्थानांतरित किया जाएगा। अधिकारियों का तर्क है कि यदि पुराने क्षेत्र से ही एसआईआर की प्रक्रिया पूरी कर दी जाए तो बाद में उसी नाम को हटाने और नए क्षेत्र में जोड़ने की दोहरी प्रक्रिया करनी पड़ेगी। हालांकि अधिकांश विस्थापित परिवारों का कहना है कि उन्हें इस प्रक्रिया की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी पहले ही स्वीकार कर चुके हैं कि हाल में ध्वस्त की गई बस्तियों में मतदाताओं का सत्यापन एक विशेष चुनौती है। उनके अनुसार ऐसे मामलों में अलग से निर्णय लिया जाएगा लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक स्पष्ट व्यवस्था नहीं बनने से पुनर्वासित परिवार असमंजस की स्थिति में हैं। ऐसे में एसआईआर की प्रक्रिया के बीच इन परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने मताधिकार को सुरक्षित बनाए रखने की बन गई है। इसलिए बढ़ी परेशानी 14 जून को कई बस्तियों में ध्वस्तीकरण अभियान चला पात्र परिवारों को सावदा घेवरा में पुनर्वासित किया गया 30 जून से एसआईआर शुरू हो गया पुराने पते पर मतदाता सूची में नाम अभी भी दर्ज हैं नए पते पर नाम स्थानांतरित करने के लिए फॉर्म-8 भरना आवश्यक अधिकांश परिवारों को प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने से भ्रम की स्थिति बनी हुई है

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jul 19, 2026, 02:03 IST
पूरी ख़बर पढ़ें »




Delhi SIR: उजड़े घर और उलझे वोट, पुनर्वास के बाद एसआईआर में फंसे हजारों परिवार; अधूरी जानकारी से बढ़ी परेशानी #CityStates #DelhiNcr #Delhi #SpecialIntensiveRevision(sir2026) #SubahSamachar