पुतिन से डील के बाद ट्रंप का यू-टर्न: रूसी तेल-गैस खरीद से हटाया बैन और टैरिफ, भारत को मिलेगी राहत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रीय हित का हवाला देते हुए रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने से संबंधित कानून के तहत प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों से छूट देने का आदेश जारी किया है। रूसी तेल और गैस खरीद पर डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले सेभारत और चीन को बड़ी राहत मिली है। हालांकि, यह अमेरिकी राष्ट्रपति का बड़ा यू-टर्न माना जा रहा है। ट्रंप ने शुक्रवार शाम जारी कार्यकारी आदेश में कहा, “मैं इसके तहत ग्राहम कानून में दिए गए ऐसे प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों के लागू होने से छूट दे रहा हूं।”उन्होंने कहा कि इस समय ऐसी छूट देना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। इस संबंध में उन्होंने कांग्रेस को प्रमाणपत्र भी सौंपा है। बता दें कि ये प्रतिबंध और शुल्क उनके द्वारा पिछले महीने हस्ताक्षरित विधेयक के तहत लागू होने वाले थे। इनके प्रभावी होने से एक दिन पहले ट्रंप ने यह फैसला लिया। ट्रंप ने क्यों लिया यू-टर्न यह कार्यकारी आदेश ऐसे समय आया है, जब ट्रंप रूस के प्रति नरम रुख अपनाते दिखाई दे रहे हैं। वह सार्वजनिक रूप से यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की आलोचना भी कर चुके हैं। यहां तक कि उन्होंने सुझाव दिया था कि यूक्रेन को नया नेता चुनना चाहिए। US President Donald Trump implements the Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026. "Section 115 of the Graham Act authorizes the President to waive the application of any sanctions provision with respect to a foreign person, any restriction with respect to a person, and any duty under the Graham Act, subject to the submission to the Congress of a written certification that such a waiver is in the national interests of the United States and a report explaining the basis for the certification. As described further in section 4 of this order, I am hereby waiving the application of such sanctions, restrictions, and duties provided for in the Graham Act. I have submitted to the Congress a certification that the issuance of such a waiver at this time is in the national interests of the United States." — ANI (@ANI) October 17, 2026 पिछले सप्ताह ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक समझौते की घोषणा की थी, जिसके तहत रूस अमेरिका को डीजल की आपूर्ति करेगा। समझौते के अनुसार, रूस तत्काल 3 लाख टन से अधिक डीजल भेजेगा। इसके बाद आने वाले महीनों में और खेप भेजी जाएंगी। जेलेंस्की ने अमेरिका और रूस के बीच हुए डीजल समझौते की आलोचना की थी। उन्होंने इसे ''हमारे साझेदारों के लिए अशोभनीय'' और ''कमजोर फैसला'' बताया था। उन्होंने यह आरोप भी लगाया था कि इस समझौते के लिए मॉस्को अपना “आभार” यूक्रेन पर हमले करके जता रहा है। भारत पर क्या पड़ता असर अगर ट्रंप भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाते, तो यह अमेरिका की ओर से भारतीय आयात पर पहले से लगाए गए 10 प्रतिशत शुल्क के अतिरिक्त होता। अमेरिका ने यह 10 प्रतिशत टैरिफ जबरन मजदूरी के इस्तेमाल से बने सामानों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाने के आरोप में लगाया था।हालांकि, नए टैरिफ से भारतीय निर्यात पर पड़ने वाले वास्तविक असर का आकलन शुल्क दरों की आधिकारिक घोषणा के बाद ही किया जा सकता था। पिछले साल रूस से कच्चे तेल के आयात को लेकर भारत और अमेरिका के संबंधों में तनाव बढ़ गया था। उस समय ट्रंप ने भारतीय आयात पर रूस से तेल खरीदने के कारण 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया था। यह शुल्क पहले से लागू 25 प्रतिशत जवाबी टैरिफ के अतिरिक्त था।हालांकि, फरवरी 2026 में अतिरिक्त टैरिफ हटा लिया गया था। वहीं, भारत-अमेरिका व्यापार ढांचे के तहत जवाबी टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया था। भारत ने दिया था क्या जवाब पिछले महीने अमेरिकी कांग्रेस द्वारा रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक को पारित किए जाने के बाद भारत ने स्पष्ट किया था कि वह अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाने को प्रतिबद्ध है। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा था, ''जैसा कि पहले भी कई मौकों पर कहा गया है, भारत अपने 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसके लिए वह ऊर्जा के विविध स्रोतों से आपूर्ति जारी रखेगा और बदलते बाजार की परिस्थितियों के अनुसार फैसले लेगा।'' क्या है यह विधेयक 'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' नामक कानून सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर बनाया गया था। लिंडसे अमेरिकी संसद में यूक्रेन के प्रमुख समर्थकों में से एक थे। इस साल जुलाई में कीव की यात्रा से लौटने के कुछ समय बाद उनका निधन हो गया था। इस कानून के तहत ट्रंप को रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले पांच प्रमुख देशों चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान से आने वाले सभी सामानों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने के लिए 30 दिन का समय दिया गया था। इसके अलावा, रूस की कई संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाने और अमेरिका में आयात होने वाले सभी रूसी ऊर्जा उत्पादों पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रावधान भी था।इसकी एक महीने की समयसीमा 18 अक्तूबर को समाप्त होने वाली थी।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Oct 17, 2026, 04:37 IST
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