पश्चिम एशिया संघर्ष: अमेरिकी वित्त मंत्री का दावा- आर्थिक नाकेबंदी से बेदम ईरान अब परमाणु डील के लिए मजबूर

अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से जारी भारी तनाव के बाद आखिरकार एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी मिलती दिख रही है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने एलान किया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य कार्रवाई और आर्थिक प्रतिबंधों की रणनीति रंग लाई है। इसी भारी दबाव की वजह से ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत करने के लिए टेबल पर आने को मजबूर हुआ है। बेसेंट ने कहा कि यह सफलता आज तक कोई दूसरा अमेरिकी प्रशासन हासिल नहीं कर पाया था। अब ईरान को अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से छोड़ना होगा। ट्रंप की सख्त शर्तें: यूरेनियम सौंपे और समुद्री रास्ता खोले ईरान स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ईरान के साथ कोई भी समझौता पूरी तरह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इच्छा पर निर्भर करता है। ट्रंप अमेरिकी जनता के हितों से कोई समझौता नहीं करेंगे। इस समझौते के लिए अमेरिका ने ईरान के सामने बेहद सख्त शर्तें रखी हैं:- ईरान को अपना सारा संवर्धित यूरेनियम सौंपना होगा। ईरान को गारंटी देनी होगी कि वह कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। सामरिक रूप से महत्वपूर्ण जलमार्ग होर्मुज से जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह मुक्त करना होगा। जब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह नहीं खुलता और ईरान यूरेनियम सौंपने पर राजी नहीं होता, तब तक कोई भी डील फाइनल नहीं होगी। यह भी पढ़ें:अमेरिका का फरमान:ईरानी विमानों की लैंडिंग और रीफ्यूलिंग पर सख्त पाबंदी, मदद करने वाले देशों पर भी गिरेगी गाज तेल संकट से मिलेगी राहत, 60 दिनों का अस्थायी समझौता तैयार ईरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद किए जाने से वैश्विक तेल सप्लाई ठप हो गई थी। फिलहाल करीब 2,000 व्यापारिक जहाज खाड़ी से बाहर निकलने का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, बातचीत शुरू होने से मई में कच्चे तेल की कीमतें 10 फीसदी तक गिर चुकी हैं और संकट टलते ही दाम और तेजी से नीचे आएंगे। एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के वार्ताकारों ने 60 दिनों के अस्थायी समझौता ज्ञापन का मसौदा तैयार कर लिया है। इसका उद्देश्य मौजूदा नाजुक युद्धविराम को आगे बढ़ाना है। मंगलवार तक सभी शर्तें तय हो चुकी हैं, बस दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी बाकी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने अंतिम मसौदे की समीक्षा के लिए कुछ दिनों का समय मांगा है। यदि यह समझौता फाइनल होता है, तो यह 28 फरवरी को शुरू हुए संघर्ष के बाद से अब तक की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत होगी।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: May 29, 2026, 07:02 IST
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