चश्मदीद बोले : बचाव कार्य में बरती लापरवाही
- चश्मदीद के आरोप, पहली बार में बिना तैयारी पहुंची थी पुलिस, रस्सी और उपकरण तक नहीं थे मौजूदमाई सिटी रिपोर्टरग्रेटर नोएडा। इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में कई चश्मदीदों के बयान सामने आ रहे हैं। चश्मदीदों ने उस रात के बचाव अभियान पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चश्मदीद के अनुसार एक ओर पानी से भरे गड्ढे में युवराज फंसे हुए थे। मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाकर मदद का इंतजार कर रहे थे। इसे देखकर चश्मदीद ने रात 12:14 मिनट पर डायल 112 पर कॉल की। जिसकी कॉल हिस्ट्री उसके मोबाइल में सुरक्षित है। इसके करीब छह मिनट बाद 12:20 बजे पहली पीसीआर मौके पर पहुंची। लेकिन पुलिसकर्मी बिना किसी ठोस तैयारी के मौके पर आए थे। कुछ देर बाद दूसरी पीसीआर भी पहुंच गई और फिर थोड़ी देर बाद वहां भीड़ बढ़ने पर युवराज के पिता भी आ गए। दोनों पीसीआर में मौजूद पुलिसकर्मियों के पास न तो रस्सी थी और न ही कोई जरूरी रेस्क्यू उपकरण। गड्ढा गहरा और पानी बेहद ठंडा था लेकिन मौके पर मौजूद किसी भी पुलिसकर्मी के पास युवराज तक पहुंचने का कोई सुरक्षित साधन नहीं था। चश्मदीदों का आरोप है कि फायर ब्रिगेड करीब डेढ़ घंटे की देरी से पहुंची। उनके पास सीढ़ी तो थी लेकिन कोई भी ठंडे पानी में उतरने को तैयार नहीं हुआ। प्रत्यक्षदर्शी का दावा किया है कि यदि उसने पुलिस को फोन करने के बजाय युवराज के दोस्तों और आसपास के गांव से लोगों को बुलाया होता तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी। चश्मदीद के अनुसार घटना की रात उसके पास दो युवक आए और बताया कि पास के प्लॉट में कोई मदद के लिए चिल्ला रहा है। इसके बाद वह अपने दो दोस्तों के साथ मौके पर पहुंचा था। उसका कहना है कि अगर उसी समय युवराज के दोस्तों और आसपास के गांव के लोगों बुलाया जाता, जो तैराकी जानते थे और जरूरी संसाधन जुटा सकते थे, तो शायद हालात कुछ और होते। गांव के पास से यमुना बहती है। इस कारण भी गांव के कई लोगों को तैरना आता है। युवराज काफी देर तक मोबाइल की फ्लैश जलाकर अंधेरे में मदद का इंतजार करता रहा, लेकिन समय पर प्रभावी रेस्क्यू नहीं हो सका।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jan 22, 2026, 17:26 IST
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