फर्जी आईएएस विप्रा की कहानी: खुद ही कर लिया अपना प्रमोशन, एसयूवी पर लिखा एडीएम, लोगों से ऐसे की ठगी

बरेली में फर्जी आईएएस विप्रा शर्मा खुद को अफसरों जैसा ढालने के साथ ही लोगों से ठगी करती रही। रुतबा बढ़ाने के चक्कर में प्रमोशन का ढिंढोरा पीटकर खुद ही एसडीएम से एडीएम बन बैठी। एएसपी पंकज श्रीवास्तव व बारादरी थाना प्रभारी विजेंद्र सिंह ने पूछताछ की तो विप्रा ने बताया कि उसके पिता कई साल पहले बरेली में सिंचाई विभाग के प्रशासनिक अधिकारी बनकर आए थे। गोल्डन ग्रीन पार्क में उन्होंने मकान बनाया। उसका बचपन यहीं बीता। विप्रा ने रुहेलखंड विश्वविद्यालय से इतिहास और अंग्रेजी में एमए किया। आगरा विश्वविद्यालय से इतिहास में पीएचडी करने का दावा भी किया, पर प्रमाण नहीं दे सकी। विप्रा ने बताया कि पिता चाहते थे कि बेटी प्रशासनिक अफसर बने, इसलिए उसने भी मन से पढ़ाई की। वर्ष 2012 से 2020 तक चार बार परीक्षा दी। कामयाबी नहीं हुई तो उसने खुद को अधिकारी मान लिया। बड़ी बहन शिखा ने विप्रा को एसडीएम बताना शुरू कर दिया। विप्रा ने उन दिनों पुरानी काले रंग की कार खरीदी, जिस पर आगे एसडीएम लिखा था। उन दिनों उसने खुद को एसडीएम बताकर बेरोजगारों से ठगी की। लखनऊ जाकर भेजते थे डाक, वेतन भी ऑनलाइन भेजा विप्रा की ठगी की रकम तीनों बहनों के अलग-अलग खातों में जमा होती थी। विप्रा ने ठगी के रुपये से पहले पवन विहार में अपनी ममेरी बहन दीक्षा का आलीशान मकान तैयार कराया। इस मकान में ही तीनों बहनें फर्जी नियुक्ति पत्र छापती थीं। बहनों ने बेहद शातिराना तरीके से ठगी की। इनमें से ही कोई लखनऊ जाकर डाक के जरिये पत्र भेजती थी ताकि किसी को शक न हो। तीनों बहनों ने स्वीकार किया कि कुछ लोगों के खातों में उन्होंने कुछ महीने ऑनलाइन वेतन भी भेजा ताकि उनको सरकारी नौकरी का भरोसा हो जाए।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Apr 29, 2026, 10:34 IST
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