Gwalior News: आज भी नहीं लग सकी 16 साल पुराने सिंधिया राजपरिवार के संपत्ति विवाद पर अंतिम मुहर, सुनवाई 20 को

करीब डेढ़ दशक से सिंधिया राजपरिवार की संपत्तियों को लेकर कानूनी लड़ाई चल रही है। यह विवाद सिर्फ ग्वालियर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दिल्ली, मुंबई और पुणे की अदालतों तक पहुंचा। अब दोनों पक्षों ने समझौते का रास्ता चुना है और ग्वालियर जिला न्यायालय में समझौता आवेदन भी प्रस्तुत किया जा चुका है। 16 साल पुराना विवाद करीब 40 हजार करोड़ की संपत्ति एक दर्जन से ज्यादा मुकदमे ग्वालियर, दिल्ली, मुंबई और पुणे की अदालतों में सुनवाई ये भी पढ़ें-ACP संतोष पटेल की अनसुनी कहानी:इंजी.के बाद नौकरी नहीं मिली तो मजदूरी की, फॉरेस्ट गार्ड बने फिर हासिल की मंजिल इस विवाद में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआ वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे सिंधिया तथा उषा राजे राणा पक्षकार हैं। विवाद का केंद्र राजपरिवार की विरासत में मिली संपत्तियां और उनसे जुड़े ट्रस्ट हैं। इनमें ग्वालियर का जय विलास पैलेस, उषा किरण पैलेस, शिवपुरी का माधव पैलेस, ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की कई अचल संपत्तियां और दिल्ली, मुंबई व पुणे की संपत्तियां शामिल हैं। इसके अलावा सर जयाजीराव ट्रस्ट और कृष्ण माधव ट्रस्ट जैसी संस्थाओं की संपत्तियां भी विवाद का हिस्सा रही हैं। किन संपत्तियों पर विवाद जय विलास पैलेस, ग्वालियर उषा किरण पैलेस माधव पैलेस, शिवपुरी दिल्ली, मुंबई और पुणे की संपत्तियां सर जयाजीराव ट्रस्ट कृष्ण माधव ट्रस्ट बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच करीब 40 पन्नों का समझौता तैयार किया गया है। प्रस्तावित फॉर्मूले के अनुसार, जो पक्ष जिस संपत्ति पर वर्तमान में काबिज है, वही संपत्ति उसके पास रहेगी। यानी मौजूदा कब्जे को ही मालिकाना हक का आधार माना जाएगा। हालांकि इस फॉर्मूले पर अदालत की अंतिम मंजूरी अभी बाकी है। सिंधिया राजपरिवार के करीब 40 हजार करोड़ रुपये के संपत्ति विवाद में बुधवार कोअंतिम फैसला नहीं हो सका। ग्वालियर जिला न्यायालय में समझौते पर कानूनी मुहर लगने की उम्मीद थी, लेकिन सुनवाई आगे बढ़ गई। आखिर क्यों टली सुनवाई हाई कोर्ट के सीनियर एडवोकेट प्रशांत शर्मा ने बताया कि करीब 16 साल से चल रहे सिंधिया राजपरिवार के संपत्ति विवाद में 8 जुलाई 2026 को ग्वालियर जिला न्यायालय में महत्वपूर्ण सुनवाई प्रस्तावित थी। उम्मीद जताई जा रही थी कि दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते पर अदालत अपनी अंतिम मुहर लगा सकती है। हालांकि ऐसा नहीं हो सका। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने अदालत में अर्ली हियरिंग से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किया, जिसके बाद मामले की सुनवाई अब 20 जुलाई के बाद के लिए निर्धारित कर दी गई।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jul 08, 2026, 19:31 IST
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