मुद्दा: खाद्य सुरक्षा के साथ पैकेजिंग पर भी फोकस जरूरी, भ्रामक दावों और नियमों पर उठे सवाल

देश में खाद्य सुरक्षा के लिए जिम्मेदार सरकारी संगठन एफएसएसएआई को हाल ही में यकायक यह ख्याल आया कि खुदरा या थोक में खाद्य पदार्थ या सामग्री की सही तरीके से बिक्री नहीं की जा रही। ऐसा नहीं है कि इस बाबत कोई नियम-कायदे नहीं हैं, लेकिन वे क्रियान्वयन की तरफ बमुश्किल ही बढ़ पाए हैं। हर बार संगठन में नए प्रमुख या मुख्य कार्यकारी की नियुक्ति के साथ बड़े उत्साह से अभियान शुरू किया जाता है, पर कुछ ही दिनों बाद उसका जोश ठंडा पड़ जाता है और हालात पहले जैसे हो जाते हैं। अक्सर इन अभियानों का निशाना मिलावटी खाद्य पदार्थ और खुले में खाद्य वस्तुएं बेचने वाले होते हैं। इनके मध्य पैकेजिंग, डिस्प्ले, सामग्री अवयव, पकाने की प्रक्रिया, एक्सपायरी वस्तुओं के निस्तारण को जाहिर करने समेत अनेकानेक मूलभूत प्रश्न अनुत्तरित ही छूटे हुए हैं। इस संबंध में नए आदेश और दिशा-निर्देश जारी कर अखबारी कागज, स्टेपल पिन, पिन और तार के इस्तेमाल पर सख्त कार्रवाई का संकेत दिया गया। लेकिन, यह सख्ती ज्यादा दिन नहीं टिक सकी और कुछ समय बाद खाद्य सामग्री की बिक्री फिर पुराने ढर्रे पर लौट आई। असल में यह सख्ती किसी खास घटना की तत्काल प्रतिक्रिया भर थी और इसमें ठोस व व्यापक अमल का भी अभाव रहा। जारी परिपत्र में दोष के मूल कारण को प्रकट करते हुए उसके स्वास्थ्य पर होने वाले प्रभावों के साथ उपलब्ध सस्ते विकल्पों का सुझाव भी दिया जाना चाहिए था। इसी प्रकार बिक्री के दौरान पैकेट को पिन से बंद करने से होने वाली क्षति का विवरण भी नहीं दिया गया। बिना खाद्य सुरक्षित स्याही से मुद्रित कागजों में भोजन परोसने से विषैले रसायन शरीर में प्रवेश कर विभिन्न अंगों एवं तंत्रों को नुकसान पहुंचाते हैं। लिफाफों को बंद करने के लिए उपयोग किए जाने वाले तार या पिन पहले तो पैकेट खोलने के दौरान चुभकर चोट का कारण बनते हैं और यह आशंका भी बनी रहती है कि उसके अतिसूक्ष्म होने के कारण वह भोजन के साथ शरीर में जाकर भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। अनेक प्रतिष्ठान पैकेट बंद करने के लिए टेप, स्टीकर और चिपकने वाले पदार्थों का भी उपयोग करते हैं। इन सभी के अंश खाने वाले के हाथ या अन्य माध्यम से भोज्य पदार्थ तक पहुंचकर नुकसान को बुलावा देते हैं। तय मानक के अनुसार, किसी भी खाद्य पदार्थ या सामग्री को फूड ग्रेड स्याही में छपे हुए कागज या पैकेजिंग में ही बेचा जा सकता है, जिसकी लागत सामान्य स्याही से अधिक होती है। दूसरा, खाने योग्य स्याही होने का आकलन करना सामान्य उपभोक्ता के लिए संभव भी नहीं है। वर्तमान में नियमों में प्रवृत्त आर्थिक दंड के प्रावधान उत्पादन और बिक्री करने वालों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालते। बीते दिनों पैकेज्ड खाद्य सामग्री को भ्रामक तरीके से बेचने के भी अनेक प्रकरण सामने आए हैं। इनमें मुख्यतया खाद्य सामग्री को ऑर्गेनिक या मैदाविहीन एवं सौ प्रतिशत गेहूं आटा युक्त इंगित करते पैकेज्ड फूड सर्वव्यापी पाए गए। आज के समय में, खासकर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक युवा, किसी उत्पाद के अवयवों की सूची पढ़े बिना ही उसके आकर्षक दावों और पैकेजिंग से प्रभावित होकर उसे खरीद लेते हैं। कानूनन इस प्रकार के भ्रामक और तथ्यविहीन दावों पर रोक लगी हुई है, किंतु उपभोक्ता जागरूकता के अभाव में यह सब दावे निरंतर चले जा रहे हैं। आम तौर पर खाद्य सामग्री की पैकेजिंग पर अंग्रेजी में तथा बारीक अक्षरों में अंकित विवरण आम उपभोक्ताओं की समझ से परे होते हैं। इस बाबत नियमों के माध्यम से उत्पादनकर्ता को स्थानीय भाषा तथा पढ़े जाने योग्य आकार में मुद्रण हेतु पाबंद किए जाने की जरूरत है। मुद्रण निर्देशों में उस उत्पाद से हो सकने वाली एलर्जी, स्वास्थ्य प्रभाव आदि को भी प्रमुखता से अंकित किया जाना चाहिए, अन्यथा वह किसी कोने में औपचारिकता पूरी करने के लिए अंकित कर दी जाएगी। खाद्य पदार्थ और सामग्री की गुणवत्ता के साथ उसकी पैकेजिंग, वितरण एवं बिक्री के प्रावधान इतने सख्त एवं त्वरित होने चाहिए कि उसमें संलग्न प्रतिष्ठान या व्यक्ति शिथिलता का साहस ही न जुटा पाए। खाद्य पदार्थ एवं सामग्री सीधे-सीधे आमजन के स्वास्थ्य एवं जीवन से जुड़े हैं, अतः खाद्य सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध आपराधिक कानून के तहत दंडात्मक कार्यवाही की जानी चाहिए और दोषियों को भविष्य में संबंधित व्यवसाय के लिए पूरी तरह से अयोग्य घोषित कर दिया जाना चाहिए।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Aug 05, 2026, 03:51 IST
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