Delhi NCR News: रंगदारी मामले में आप के पूर्व विधायक नरेश बालियान सभी आरोपों से बरी
पुलिस जांच में खामियों पर अदालत सख्त, कहा- इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी नहीं जुटा पाई पुलिस- पहले से ही पूर्व विधायक को दोषी मानकर जांच शुरू कीं, जांच का मूल उद्देश्य भूली पुलिसअमर उजाला ब्यूरोनई दिल्ली। राउज एवेन्यू स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट ने रंगदारी (एक्सटॉर्शन) के मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व विधायक नरेश बालियान को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) पारस दलाल ने कहा कि पुलिस जांच में गंभीर खामियां हैं और अभियोजन पक्ष बालियान के खिलाफ मुकदमा चलाने लायक प्रथमदृष्टया मामला भी स्थापित नहीं कर सका। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति को मुकदमे का सामना करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।अदालत के अनुसार, शिकायतकर्ता को मई-जून 2023 में व्हाट्सएप के जरिए धमकी और रंगदारी से जुड़े ऑडियो संदेश मिले थे, लेकिन जांच एजेंसी ने शिकायतकर्ता का मूल मोबाइल फोन जब्त नहीं किया। इसके बजाय शिकायतकर्ता के बेटे से प्राप्त पेन ड्राइव को साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया गया। कोर्ट ने कहा कि मूल डिवाइस उपलब्ध होने के बावजूद उसे जब्त न करना जांच की बड़ी कमी है।कोर्ट ने पाया कि मामले की जांच मुख्य रूप से फेसबुक पर प्रसारित दो ऑडियो क्लिप और एक समाचार चैनल के कार्यक्रम ऑपरेशन पाप पर आधारित थी। हालांकि पुलिस यह पता नहीं लगा सकी कि ऑडियो सबसे पहले किसने रिकॉर्ड किए, फेसबुक पर किसने अपलोड किए और उनका मूल स्रोत क्या था। फेसबुक से अपलोडर, आईपी एड्रेस या मूल डिवाइस का विवरण भी नहीं मांगा गया, जिससे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की चेन ऑफ कस्टडी और प्रामाणिकता स्थापित नहीं हो सकी।अदालत ने यह भी कहा कि समाचार चैनल से केवल कार्यक्रम की रिकॉर्डिंग ली गई, लेकिन यह जांच नहीं की गई कि चैनल को ऑडियो किसने उपलब्ध कराए। साथ ही, शिकायतकर्ता की 2023 में दर्ज मूल शिकायत में नरेश बालियान का नाम भी नहीं था। कोर्ट ने जुलाई 2023 में दर्ज मामले की करीब तीन वर्ष तक चली जांच की गति और तरीके पर भी सवाल उठाए।जांच का उद्देश्य सच्चाई तक पहुंचना, पुलिस ने बालियान को दोषी मानकर की जांचआदेश में कहा गया कि निष्पक्ष जांच का उद्देश्य सच्चाई तक पहुंचना होता है, न कि किसी व्यक्ति को पहले से दोषी मानकर उसके खिलाफ साक्ष्य जुटाना। इस मामले में जांच शुरू से ही इस धारणा पर चलती दिखी कि आरोपी दोषी है।अदालत ने बालियान पर साक्ष्य मिटाने के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 201 लगाने के पुलिस के तर्क को भी खारिज करते हुए कहा कि अभियोजन यह साबित नहीं कर सका कि उस मोबाइल में ऐसा कौन-सा साक्ष्य था जिसे जानबूझकर नष्ट किया गया। मामले के मुख्य आरोसी गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू अब भी फरार है और उसके खिलाफ मुकदमा अनुपस्थिति में जारी रहेगा।इधर, मकोका मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, जमानत याचिका खारिजदिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को नरेश बालियान की मकोका मामले में जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति मनोज जैन ने कहा कि याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती। बालियान को 4 दिसंबर 2024 को महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका) के तहत गिरफ्तार किया गया था। उसी दिन उन्हें वसूली के एक अन्य मामले में ट्रायल कोर्ट से जमानत मिल गई थी।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Aug 03, 2026, 19:05 IST
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