US: ट्रंप के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने कबूला जुर्म, गोपनीय दस्तावेज मामले में दोषी करार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रह चुके जॉन बोल्टन ने गोपनीय सरकारी दस्तावेजों को अवैध रूप से अपने पास रखने के मामले में अदालत में दोष स्वीकार कर लिया है। बोल्टन ने शुक्रवार को अमेरिकी अदालत में अपना जुर्म कबूल किया। इस मामले में उनके और अमेरिकी न्याय विभाग के बीच समझौता भी हुआ है, जिससे उन्हें जेल की सजा से राहत मिल सकती है। हालांकि अंतिम फैसला अदालत ही सुनाएगी। 77 वर्षीय जॉन किरियाको नहीं, बल्कि जॉन बोल्टन ट्रंप प्रशासन में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे थे। उन्होंने मैरीलैंड के ग्रीनबेल्ट स्थित अमेरिकी जिला अदालत में राष्ट्रीय रक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी को अवैध रूप से अपने पास रखने के एक मामले में दोषी होने की बात स्वीकार की। इस अपराध के लिए अधिकतम 10 साल जेल की सजा का प्रावधान है। बोल्टन को 28 अक्टूबर को सजा सुनाई जाएगी। इस बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए बोल्टन को भयानक व्यक्ति बताया और कहा कि उनके साथ सख्ती से पेश आना चाहिए। ये भी पढ़ें-होर्मुज पर सख्ती:ईरान की मंजूरी के बिना नहीं गुजर सकेंगे जहाज; तीन तेल टैंकर लौटे, वार्ता पर भी मंडराया संकट जॉन बोल्टन पर क्या आरोप लगे थे अमेरिकी अभियोजकों के अनुसार, बोल्टन पर पिछले साल अक्टूबर में कुल 18 आरोप लगाए गए थे। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान तैयार की गई डायरी जैसी निजी नोट्स और अन्य गोपनीय जानकारियां अपने पास रखीं और उनमें से कुछ को अपने परिवार के सदस्यों के साथ साझा भी किया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, बोल्टन ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में अपने दैनिक कार्यों से जुड़ी 1,000 से अधिक पन्नों की जानकारी अपने परिवार को भेजी थी। क्या समझौते से जेल की सजा टल सकती है न्याय विभाग के साथ हुए समझौते के तहत बोल्टन ने 22.5 लाख अमेरिकी डॉलर का जुर्माना भरने पर सहमति जताई है। उन्हें अपनी संघीय सेवा से मिलने वाली सेवानिवृत्ति राशि भी छोड़नी होगी। इसके अलावा उन्हें खुफिया अधिकारियों के साथ पूछताछ सत्र में शामिल होना होगा और 100 घंटे तक सामुदायिक सेवा भी करनी होगी। समझौते में जेल की सजा को अधिकतम पांच साल तक सीमित रखने की सिफारिश की गई है, लेकिन अदालत इस सिफारिश को मानने के लिए बाध्य नहीं है। जांच के दौरान क्या सामने आया अदालती दस्तावेजों के मुताबिक, बोल्टन ने कुछ दस्तावेज अपनी पत्नी और बेटी के साथ साझा किए थे। एक दस्तावेज भेजने के बाद उन्होंने संदेश में लिखा था, इस बारे में हम बात नहीं करेंगे। अभियोजकों का कहना है कि हालांकि इस बात के कोई सबूत नहीं मिले कि उनके परिवार ने यह जानकारी किसी और को दी। लेकिन सरकारी सेवा छोड़ने के बाद बोल्टन के निजी ईमेल खाते को ईरान से जुड़े एक हैकर ने निशाना बनाया था, जिससे गोपनीय जानकारी तक पहुंच बनने की आशंका जताई गई। ट्रंप और बोल्टन के रिश्ते क्यों खराब हुए थे जॉन बोल्टन ने ट्रंप के पहले कार्यकाल में एक साल से अधिक समय तक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में काम किया था। वर्ष 2019 में उन्हें पद छोड़ना पड़ा। इसके बाद उन्होंने द रूम व्हेयर इट हैपन्ड नामक पुस्तक लिखी, जिसमें ट्रंप के नेतृत्व की आलोचना की गई थी। ट्रंप प्रशासन ने इस पुस्तक के प्रकाशन को रोकने की कोशिश की थी, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। इसके बाद से ट्रंप और बोल्टन के बीच सार्वजनिक तौर पर कई बार तीखी बयानबाजी भी हुई।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 27, 2026, 05:24 IST
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