रोशनी यहां है: असफलता से अवसर तक, फ्रेशवर्क्स के सीईओ गिरीश मातृभूतम ने कैसे बनाई हजारों करोड़ की कंपनी
कई बार जीवन की छोटी-सी समस्या भी बड़ा अवसर बन जाती है। फ्रेशवर्क्स के संस्थापक और सीईओ गिरीश मातृभूतम की कहानी इसी का उदाहरण है। एक साधारण ग्राहक सेवा की समस्या से उन्हें ऐसा विचार मिला जिसने आगे चलकर एक वैश्विक कंपनी का रूप ले लिया। आज उनकी कंपनी हजारों करोड़ रुपये की बन चुकी है और दुनिया भर की कंपनियों को कस्टमर सपोर्ट सॉफ्टवेयर उपलब्ध करा रही है। गिरीश मातृभूतम की सफलता की शुरुआत एक साधारण घटना से हुई। अमेरिका से भारत लौटने के बाद उन्होंने एक नया टेलीविजन खरीदा, लेकिन कुछ ही दिनों में वह खराब हो गया। उन्होंने कंपनी के सर्विस सेंटर से कई बार संपर्क किया, ईमेल और कॉल किए, लेकिन उनकी शिकायत पर ध्यान नहीं दिया गया। जब उन्होंने अपनी परेशानी सोशल मीडिया पर लिखी तो कंपनी तुरंत सक्रिय हो गई। इस घटना से गिरीश को एहसास हुआ कि दुनिया को बेहतर कस्टमर सर्विस सिस्टम की जरूरत है। गिरीश मातृभूतम का बचपन कैसा रहा गिरीश का जन्म तमिलनाडु के त्रिची शहर में एक साधारण परिवार में हुआ। उनके पिता एक सरकारी बैंक में काम करते थे। बचपन में ही उनके माता-पिता अलग हो गए, जिससे परिवार को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। पढ़ाई में वे औसत छात्र थे और बारहवीं की बोर्ड परीक्षा में असफल भी हो गए। इस असफलता के कारण उन्हें लोगों की आलोचनाएं भी सुननी पड़ीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। असफलता के बाद उन्होंने आगे कैसे कदम बढ़ाया बारहवीं में असफल होने के बाद गिरीश ने दोबारा पढ़ाई की और अपनी शिक्षा पूरी की। बाद में इंजीनियरिंग पढ़ने के लिए चेन्नई चले गए। वे किताबों से ज्यादा अनुभव से सीखने में विश्वास रखते थे। इसी दौरान उन्होंने तकनीक और सॉफ्टवेयर की दुनिया को समझना शुरू किया। उनकी यही सीख आगे चलकर उनके करियर में बेहद काम आई। करियर की शुरुआत और संघर्ष का दौर कैसा था इंजीनियरिंग के बाद गिरीश एमबीए करना चाहते थे, लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर थी। उनके पिता ने रिश्तेदारों से कर्ज लेकर उनकी पढ़ाई का इंतजाम किया। पढ़ाई के दौरान उन्होंने छोटे-मोटे काम किए और जावा भाषा सीखकर दूसरों को प्रशिक्षण देना शुरू किया। उन्होंने जावा प्रशिक्षण का एक संस्थान भी खोला, लेकिन वह ज्यादा समय तक नहीं चला। बाद में वे अमेरिका गए और एचसीएल में काम किया, जहां उन्होंने कंपनियों की कार्यप्रणाली और कस्टमर सर्विस सिस्टम को करीब से समझा। फ्रेशवर्क्स की शुरुआत कैसे हुई वर्ष 2010 में गिरीश ने अपने मित्र शान कृष्णासामी के साथ चेन्नई में फ्रेशवर्क्स की स्थापना की। कंपनी का उद्देश्य आसान और किफायती कस्टमर सपोर्ट सॉफ्टवेयर तैयार करना था। शुरुआत में निवेशकों को मनाना आसान नहीं था, लेकिन लगातार प्रयास के बाद 2011 में एक्सेल ने कंपनी में लगभग 10 लाख डॉलर का निवेश किया। इसके बाद कंपनी तेजी से आगे बढ़ी और दुनिया भर की कंपनियों को क्लाउड-आधारित कस्टमर सर्विस समाधान देने लगी। फ्रेशवर्क्स की सफलता ने क्या नया उदाहरण पेश किया फ्रेशवर्क्स की सफलता ने भारतीय स्टार्टअप दुनिया में एक नया उदाहरण पेश किया। वर्ष 2021 में कंपनी अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हुई। उस समय कंपनी के लगभग 500 कर्मचारी करोड़पति बन गए। आज फ्रेशवर्क्स के कार्यालय भारत, अमेरिका, पेरिस और नीदरलैंड समेत कई देशों में हैं। कंपनी की ग्राहक सूची में होंडा, सिस्को और तोशिबा जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं। वर्ष 2025 तक कंपनी की संपत्ति करीब 7800 करोड़ रुपये बताई जाती है। गिरीश मातृभूतम की कहानी युवाओं को क्या संदेश देती है गिरीश मातृभूतम की कहानी यह बताती है कि असफलता स्थायी नहीं होती। यदि किसी व्यक्ति में मेहनत करने की इच्छा, सीखने का जज्बा और अवसर पहचानने की क्षमता हो तो वह बड़ी सफलता हासिल कर सकता है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद सकारात्मक सोच और स्पष्ट लक्ष्य के साथ आगे बढ़ने से साधारण पृष्ठभूमि से भी असाधारण उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Mar 09, 2026, 08:01 IST
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