लंबी उम्र नहीं, स्वस्थ जिंदगी: विश्व में न्यूट्रास्यूटिकल्स का उभरता साम्राज्य, क्यों लेते हैं लोग पूरक आहार?

स्वस्थ और संतुलित जीवन जाने की चाहत से दुनियाभर में पूरक खाद्य उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ी है। भारत में इस सेक्टर को न्यूट्रास्यूटिकल्स इंडस्ट्री कहा जाता है, जबकि अमेरिका जैसे देशों में डायटरी सप्लीमेंट्स या फूड सप्लीमेंट्स के नाम से जाना जाता है। इन उत्पादों का वैश्विक बाजार 350 अरब डॉलर से अधिक है, जिसमें औसतन 6 फीसदी की वार्षिक चक्रवृद्धि दर देखी गई है। इस सेक्टर में 25-30 फीसदी हिस्सेदारी सिर्फ अमेरिका की है। भारत ने भी 2035 तक न्यूट्रास्यूटिकल्स का 100 अरब डॉलर का बाजार विकसित करने का लक्ष्य रखा है। सप्लीमेंट्स और न्यूट्रास्यूटिकल्स डायटरी सप्लीमेंट्स और न्यूट्रास्यूटिकल्स दोनों स्वास्थ्यवर्धक पूरक खाद्य उत्पाद हैं। इनमें एकल या मल्टी-विटामिन, खनिज तत्व, जड़ी-बूटियां, प्रोटीन, अमीनो एसिड, ओमेगा-3, प्रोबायोटिक्स, प्रीबायोटिक्स और को-एंजाइम क्यू10 शामिल हैं। ये रोगों के इलाज का दावा नहीं करते, बल्कि सामान्य स्वास्थ्य को सहारा देने के लिए जाने जाते हैं। टैबलेट्स, कैप्सूल या पाउडर के रूप में इनका सेवन किया जाता है। न्यूट्रास्यूटिकल्स या पौष्टिक-औषध प्राकृतिक स्रोतों जैसे जड़ी-बूटियां, फल-सब्जियां, अनाज और समुद्री जीवों से प्राप्त विशेष अर्क होते हैं। ये पोषण से आगे बढ़कर स्वास्थ्य लाभ, रोगों से बचाव और स्वास्थ्य रखरखाव में सहायक माने जाते हैं। इनमें एंटीऑक्सीडेंट, पॉलीफेनॉल्स, फ्लेवोनॉइड्स, प्रोबायोटिक्स जैसे जैविक रूप से सक्रिय तत्व होते हैं। कर्क्यूमिन, रेसवेराट्रॉल, गार्लिक एक्सट्रैक्ट जैसे तत्व भी इनमें शामिल रहते हैं, जो इम्यूनिटी बढ़ाने और पुरानी बीमारियों (डायबिटीज, कैंसर, हृदय रोग) से बचाव में सहायक माने जाते हैं। इन सभी तत्वों की प्रभावशीलता को लेकर पर्याप्त चिकित्सीय शोध उपलब्ध हैं। ये भी पढ़ें:विप्रो का तीसरी तिमाही का शुद्ध लाभ सात प्रतिशत गिरकर 3,119 करोड़ रुपये हुआ, जानिए आंकड़े आखिर क्यों लेते हैं लोग पूरक आहार सात देशों के 4,000 उपभोक्ताओं के सर्वे में सामने आया कि बेहतर स्वास्थ्य और संतुलित जीवन के लिए लोग सप्लीमेंट्स लेते हैं। हालांकि, इनके उपयोग के पीछे कारण विभिन्न देशों के अनुसार अलग हैं। जर्मनी में आहार की कमी को पूरा करने के लिए ये ज्यादा लिए जाते हैं, जबकि भारत में खास स्वास्थ्य समस्या में लाभ के लिए इनका सेवन अधिक होता है। गुणवत्ता और मानक उत्पादन प्रक्रिया दुनिया में इस बात पर सहमति देखने को मिलती है कि इन उत्पादों का उत्पादन उच्च गुणवत्ता वाले वातावरण में होना चाहिए। इसके लिए मानक उत्पादन प्रक्रियाएं, जिन्हें करंट गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसकहा जाता है, अपनाई जाती हैं। सभी मामलों में नियामक संस्थाएं ऐसे दावों की अनुमति नहीं देती हैं, जो किसी रोग की रोकथाम या उपचार का संकेत देते हों। ये भी पढ़ें:बजट के दिन रविवार को भी शेयर बाजार में होगा कारोबार, NSE-BSE ने किया विशेष लाइव सत्र का एलान अलग-अलग नियामक दृष्टिकोण विभिन्न देशों में इन पूरक खाद्य उत्पादों से जुड़े नियमों में भी भिन्नता है। अमेरिका जैसे देशों में अपेक्षाकृत उदार नीति है, जहां स्वास्थ्य दावों और खुराक पर कम सख्ती है। यूरोप और लैटिन अमेरिका में स्वास्थ्य लाभ के दावों, खुराक और वैज्ञानिक प्रमाणों पर कड़ी पाबंदियां हैं। भारत में इन उत्पादों का नियमन भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण करता है। इसमें हेल्थ सप्लीमेंट्स, न्यूट्रास्यूटिकल्स, विशेष आहार वाले खाद्य उत्पाद, चिकित्सीय प्रयोजन के लिए खाद्य पदार्थ, औषधीय जड़ी-बूटियों युक्त उत्पाद, प्रोबायोटिक्स और प्रीबायोटिक्स युक्त खाद्य पदार्थ व नवोन्मेषी खाद्य उत्पाद जैसी श्रेणियां हैं। अधिकांश श्रेणियां वैश्विक स्तर पर समान हैं, लेकिन विशेष चिकित्सीय प्रयोजन वाले खाद्य उत्पादों में अंतरराष्ट्रीय एकरूपता नहीं है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 17, 2026, 06:47 IST
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