जर्जर हो रहे सरकारी भवन: 11 साल में 44.5 लाख के शवदाह गृह बेकार, दो में नहीं हुआ एक भी अंतिम संस्कार; परेशानी
ग्रामीणों को अंतिम संस्कार की सुविधा देने और गंगा को प्रदूषण से बचाने के उद्देश्य से करीब 11 साल पहले जिले में तीन शवदाह गृह और अंत्येष्टि स्थलों का निर्माण कराया गया। इन पर सरकारी खजाने से 44.50 लाख रुपये खर्च हुए, लेकिन योजना का उद्देश्य अब तक पूरा नहीं हो सका। धानापुर क्षेत्र के नरौली और पंचगंगापुर-मेढ़वा में करीब 14-14 लाख रुपये की लागत से बने दो अंत्येष्टि स्थलों पर निर्माण के बाद से अब तक एक भी शवदाह नहीं हुआ। वहीं 16.50 लाख रुपये से विकसित बलुआ श्मशान घाट पर रोजाना छह से 10 शवदाह होने के बावजूद लोग शवदाह चेंबर के बजाय गंगा किनारे खुले में अंतिम संस्कार करने को मजबूर हैं। सबसे गंभीर स्थिति नरौली के अंत्येष्टि स्थल की है। 11 वर्ष बीतने के बाद भी पहुंच मार्ग की समस्या दूर नहीं हुई। नतीजा यह है कि भवन और परिसर खड़ा होने के बावजूद ग्रामीण इसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। आसपास झाड़ियां उगी हैं और स्थल उपयोग के इंतजार में पड़ा है। पंचगंगापुर और मेढ़वा स्थित करीब 14 लाख रुपये के अंत्येष्टि स्थल की कहानी भी इससे अलग नहीं है। जिस परिसर को अंतिम संस्कार के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित स्थान के रूप में विकसित किया गया था, वहां प्लाटून पुल से संबंधित लकड़ी, रस्सियां और अन्य सामान रखा है। इससे परिसर का बड़ा हिस्सा घिर गया है। सामान के आसपास झाड़ियां उगी हैं और साफ-सफाई की स्थिति भी खराब है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Sep 23, 2026, 23:05 IST
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