तकनीक : डिजिटल दौर में मौलिकता की गारंटी और स्वामित्व की चुनौती, कुछ सवाल
समय के साथ कला के स्वरूप और माध्यम बदल रहे हैं। कला हमेशा से इन्सानी सभ्यता की पहचान रही है। कभी गुफाओं की दीवारों पर उकेरी गई चित्रकारी, तो कभी कैनवास पर बनाई गई कोई जीवंत पेंटिंग। मगर इस डिजिटल दौर में कला की मौलिकता और स्वामित्व एक बड़ी चुनौती बन गई है। इंटरनेट पर किसी भी तस्वीर, संगीत या वीडियो को पलभर में कॉपी किया जा सकता है, जिससे कलाकार को उसका हक नहीं मिल पाता है। इस समस्या के हल के लिए एनएफटी यानी नॉन फंजिबल टोकन एक नए समाधान के रूप में उभरा है। एनएफटी एक तरह का डिजिटल सर्टिफिकेट है, जो यह साबित करता है कि किसी डिजिटल संपत्ति का असली मालिक कौन है। यह डिजिटल संपत्ति डिजिटल आर्ट, फोटो, वीडियो, जीआईएफ, संगीत और यहां तक कि कोई सोशल मीडिया पोस्ट किसी भी रूप में हो सकती है। एनएफटी ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित टोकन है, जिसमें डिजिटल कला को पहले एक टोकन के रूप में परिवर्तित किया जाता है और बाद में क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग करके उस टोकन को खरीदा या बेचा जाता है। यह टोकन इस बात को सुनिश्चित करता है कि किसी कला का असली रचनाकार या मालिक कौन है। इसे ऐसे भी समझ सकते हैं, जैसे पहले किसी दुर्लभ या नायाब पेंटिंग या वस्तु को नीलामी के जरिये खरीदा-बेचा जाता था और खरीदार को उसके साथ एक स्वामित्व का प्रमाणपत्र भी दिया जाता था, ठीक उसी प्रकार एनएफटी में अगर डिजिटल पेंटिंग को खरीदा जाता है, तो उसे उसका एक यूनिक स्वामित्व प्रमाण मिलता है, जिससे उस वर्चुअल प्रॉपर्टी के असली रचनाकार और मालिक को ट्रेस किया जा सकता है। भौतिक दुनिया में भले ही असली और नकली कला में फर्क करना मुश्किल हो सकता है, लेकिन एनएफटी पर दर्ज डिजिटल कला के एकमात्र असली संस्करण को प्रमाणित करना आसान है। एनएफटी की तकनीक ब्लॉकचेन एक तरह का डिजिटल बही-खाता है, जो सभी लेन-देन को सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से स्टोर करता है। जब कोई कलाकार अपनी डिजिटल कला को एनएफटी में बदलता है, तो ब्लॉकचेन पर उसका स्थायी रिकॉर्ड बन जाता है, जो उसकी मौलिकता और स्वामित्व की गारंटी देता है। रिसर्च एंड मार्केट्स संस्था की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 तक एनएफटी का कुल वैश्विक बाजार 35 अरब डॉलर था और 2032 तक यह बाजार 264 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। स्टैस्टिका की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 के अंत तक भारत में एनएफटी बाजार करीब 7.7 करोड़ डॉलर तक पहुंच सकता है। हालांकि, एनएफटी पर कानूनी और नियामक ढांचे की अस्पष्टता, क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध और टैक्स संबंधी अनिश्चितताओं के कारण भारत में एनएफटी का विकास कुछ हद तक सीमित रहा है। भारत में बॉलीवुड हस्तियां भी एनएफटी पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं, अमिताभ बच्चन ने साल 2021 में अपने पिता की काव्य रचना मधुशाला के ऑडियो संस्करण के संग्रह को करीब सात करोड़ में नीलाम किया था। कलाकार इशिता बनर्जी ने भगवान विष्णु पर बनी अपनी डिजिटल कलाकृति को करीब ढाई लाख में बेचा था। इसका एक फायदा यह भी है कि जब भी कोई कृति एनएफटी पर दोबारा बेची जाती है, तो मूल कलाकार को निश्चित रॉयल्टी भी मिलती है। दुनिया के मेटावर्स और आॅग्मेन्टेड रियलिटी की ओर बढ़ने से एनएफटी का महत्व भी बढ़ा है। हालांकि, एनएफटी बाजार में कई तरह के जोखिम भी हैं, जिनमें फेक एनएफटी बेचना, कीमतों में हेरफेर और कॉपीराइट उल्लंघन जैसे मामले शामिल हैं। एनएफटी के बारे कम जानकारी और प्रशिक्षण के कारण बहुत से कलाकारों को इसके बारे में पता नहीं होता, जिसका फायदा उठाकर कई बार फर्जी लोग उनके डिजिटल आर्टवर्क को चोरी करके एनएफटी पर बेच देते हैं। भारत और विश्व के तमाम देशों में एनएफटी से जुड़े नियमन न होने के कारण कलाकारों को कई तरह की समस्याएं भी हो सकती हैं। वहीं, पर्यावरणीय दृष्टि से देखें, तो एनएफटी का एक बड़ा नुकसान ऊर्जा की खपत भी है, अधिकतर एनएफटी लेन-देन एथेरियम ब्लॉकचेन का उपयोग करते हैं, जिससे भारी मात्रा में बिजली खर्च होती है और कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है। अत: एनएफटी भविष्य में कला, मीडिया व डिजिटल अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में अहम भूमिका निभा सकता है। यह कलाकारों को उनकी रचनाओं के लिए बाजार देने के साथ-साथ उनकी मौलिकता और स्वामित्व की सुरक्षा भी सुनिश्चित करता है। हालांकि, इसके लिए ब्लॉकचेन की स्थिरता, कानूनी स्पष्टता और व्यापक स्वीकार्यता बेहद आवश्यक होगी। अगर इन चुनौतियों का समाधान किया जाता है, तो एनएफटी डिजिटल क्रिएटिविटी के परिदृश्य को नया आकार देकर, कलाकारों और निवेशकों के लिए असीम संभावनाओं के द्वार खोल सकता है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 03, 2025, 07:07 IST
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