Mahendragarh-Narnaul News: हंकेंवि ने 12 साल में पहली बार नेत्र दिव्यांग को पीएचडी देकर रचा इतिहास
जम्मू के बहादुर लाल ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के हाथों पाई उपाधि राबिन वर्मामहेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विवि (हंकेंवि) ने दीक्षांत समारोह में जिम्मू निवासी नेत्र दिव्यांग बहादुर लाल को टीचर एजुकेशन में पीएचडी उपाधि देकर इतिहास रच दिया। विवि के 12 वर्षों के इतिहास में ऐसा गौरवशाली क्षण पहली बार आया। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू ने उन्हें उपाधि सौंपी। शनिवार को दीक्षांत समारोह में 1,462 विद्यार्थियों को उपाधियों से नवाजा गया। प्रतिभाओं से समृद्ध मेधावियों ने एक से बढ़कर एक प्रदर्शन दिखाया। लेकिन, सबका ध्यान खींचने वाले बहादुर बने जम्मू के बहादुर लाल। ब्रेल लिपि से पढ़े बहादुर लाल अब शिक्षक बनकर अपने जैसे बच्चों का जीवन बदलना चाहते हैं। वे नेट और जेआरएफ भी पास करके अपने परिवार के सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे सदस्य बन चुके हैं। शनिवार को उन्हें पीएचडी उपाधि लेने के लिए जैसे ही बुलाया गया, सीजेआई से लेकर अन्य मेहमान उनकी ओर मुखातिब हो गए। कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने बहादुर की पीठ पर आशीष रूपी हाथ रख दिया। वीसी ने उनकी उपलब्धियों, लगन और मेहनत के बारे में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू को बताया। जस्टिस नागू ने भी बहादुर की हौसला अफजाई की। उच्च शिक्षा के ऊंचे पड़ाव तक पहुंचे बहादुर लाल ने कुलपति के सहयोग का विशेष रूप से जिक्र किया। कहा, उन्हीं के मार्गदर्शन से आज आंखें न होते हुए भी पीएचडी उपाधि पाने वाला पहला विद्यार्थी बना हूं। यह गौरव का क्षण है। इस उपलब्धि से फूला नहीं समा रहा। (संवाद)-------------किसी का लक्ष्य सिविल सेवा तो कोई बनेगा प्रोफेसरसमाजशास्त्र में टॉप करने पर मुझे गोल्ड मेडल मिला है। अब सिविल सेवा में जाने की तैयारी करूंगी। शिक्षकों और परिजनों ने मुझे हमेशा पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। -सीमा, सैनीपुरा मोहल्ला, महेंद्रगढ़बॉक्स ट्रैवल एंड टूरिज्म में मास्टर डिग्री पाई है। अभी एक मल्टी नेशनल कंपनी में जॉब कर रही हूं। यही कहूंगी कि मजे करें लेकिन पढ़ाई पर फोकस कतई न हटने दें। -पूजा कुमारी, गांव रातांकलां, महेंद्रगढ़बॉक्सपुरातात्विक इतिहास में पीजी डिग्री पाई है। इसके लिए कोई खास तैयारी नहीं की थी। शिक्षकों के सिखाने की ही आज परिणाम मिला है। अब इसी विषय में पीएचडी करूंगी। -सुप्रिया शर्मा, गांव बवाना, महेंद्रगढ़बॉक्सलाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस में डिग्री पाकर बेहद खुश हूं। अब पीएचडी कर रहा हूं। मेरा लक्ष्य प्रोफेसर बनकर सेवा करना है। मेरी सफलता में शिक्षकों का बड़ा योगदान है। -दीपक, बापड़ोलीबॉक्सबीटेक में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए गोल्ड मेडल पाया है। अब इसी स्ट्रीम से मास्टर कर रहा हूं। आगे जाकर इसी क्षेत्र में देश की सेवा करने का लक्ष्य रखा है। -संस्कार, गयाजी, बिहारबॉक्सआज बड़ा सपना पूरा हुआ। मैं रोजाना रेवाड़ी से विवि आती थी। समाजशास्त्र से पीएचडी पाकर खुशी का ठिकाना नहीं है। अगला लक्ष्य शिक्षा क्षेत्र में जाने का है। -कोमल चेतीवाल, रेवाड़ी------------ फोटोसंख्या:65-कोमल फोटोसंख्या:65-कोमल फोटोसंख्या:65-कोमल फोटोसंख्या:65-कोमल फोटोसंख्या:65-कोमल फोटोसंख्या:65-कोमल
- Source: www.amarujala.com
- Published: Mar 15, 2026, 02:27 IST
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