Noida News: मेहनत को नहीं मिल रहा मजबूत ढांचा, परंपरिक और आधुनिक खेलों की अनदेखी
मेहनत को नहीं मिल रहा मजबूत ढांचा, परंपरिक और आधुनिक खेलों की अनदेखीखिलाड़ियों के लिए पर्याप्त मैदान, आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं और खेल विशेष केंद्रों का है अभावसंवाद न्यूज एजेंसी नोएडा। जब कोई खिलाड़ी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहराता है, तो उसके पीछे बरसों की मेहनत, कड़ा संघर्ष और त्याग छिपा होता है। हालांकि, गौतमबुद्ध नगर जिले में खेल और खिलाड़ियों की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। यहां खिलाड़ी और कोच सुविधाओं के भारी अभाव से जूझते हुए भी अपनी लगन से सफलता की नई कहानियां लिख रहे हैं। जिले में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, कमी है तो केवल उस मजबूत खेल ढांचे की जो इन हीरों को तराश कर वैश्विक ऊंचाइयों तक पहुंचा सके। यही गंभीर मुद्दे अमर उजाला कार्यालय सेक्टर-59 में आयोजित विशेष संवाद कार्यक्रम में जिले के विभिन्न खेल प्रशिक्षकों (कोचों) ने प्रमुखता से उठाए। प्रशिक्षकों ने बताया कि जिले में खिलाड़ियों के लिए पर्याप्त मैदान, आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं और खेल विशेष केंद्रों का अभाव है। नोएडा स्टेडियम प्रमुख खेल केंद्र होने के बावजूद सभी खिलाड़ियों को अपेक्षित अवसर नहीं मिल पाता। खेल सुविधाओं का विस्तार केवल योजनाओं तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर दिखाई देना चाहिए। इसके साथ ही कई एकेडमी बंद पड़ी हैं। प्रशिक्षकों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्विमिंग पूल, बेहतर फुटबॉल मैदान और स्क्वॉश, आर्चरी में महंगे उपकरण जैसी खेल सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी उठाया। साथ ही कुश्ती और अखाड़ा संस्कृति जैसे पारंपरिक खेलों के संरक्षण के लिए विशेष प्रयासों की जरूरत बताई। सरकार की तरफ से कोई मैदान न मिलने की वजह से कई प्रशिक्षक निजी संसाधनों से बच्चों को प्रशिक्षण देने के लिए मजबूर हैं। संवाद में खिलाड़ियों के लिए न्यूट्रिशन, काउंसलिंग, खेल चोटों के उपचार और मानसिक स्वास्थ्य सहायता जैसी सुविधाओं की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। इस दौरान कराटे, फुटबॉल, क्रिकेट, आर्चरी, स्केटिंग, एथलेटिक्स, योगा, स्वीमिंग, कुश्ती, बेटमिंटन, लॉन टेनिस, सूटिंग, कबड्डी और खो-खो जैसे अन्य खेलों के प्रशिक्षकों ने अपनी बातें रखी।अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए स्विमिंग पूल तक नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर की स्विमिंग प्रतियोगिताओं के लिए स्विमिंग पूल तक नहीं है। खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए दूसरे शहरों में जाना होता है। - तुलिका, फिटनेस कोच नोएडा स्टेडियम जिले का प्रमुख खेल केंद्र है, लेकिन वहां भी आम खिलाड़ियों और उभरती प्रतिभाओं को पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाते। विकास श्रीवास्तवबास्केटबॉल मैदानों की हालत भी संतोषजनक नहीं है। कई स्थानों पर मैदानों की सफाई व्यवस्था खराब रहती है, अभ्यास में परशानी होती है। - अशोक कुमार शर्मा, बास्केटबॉल कोचमेरी बेटी स्केटिंग करती है, उसको अभ्यास करने के लिए जगह नहीं है। स्केटिंग कोर्ट की फीस महंगी है। पैसे देने पर भी समय से जगह नहीं मिल पाती। ज्योतिका राणा, स्केटिंग कोच और खिलाड़ी नोएडा स्टेडियम में इकलौता ट्रैक बन रहा है जो 300 मीटर का है, मानकों के हिसाब से 200 या 400 मीटर का होने चाहिए। - अशोक सैनी, एथलेटिक्स कोच नेशनल गेम जीतने के बाद भी खिलाड़ियों को वह सम्मान नहीं मिल पाता है जिसके वह हकदार है। खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन करने के बाद भी मायूस रहते हैं। -कमल थापा, कराटे कोचकिसी भी खिलाड़ी के आगे बढ़ने में चार चीजें प्रमुख है पहला माता पिता का सहयोग, अनुशासन, कोच का मार्गदर्शन और बेहतर स्पोर्ट सुविधा होना। -अनादी बरूआ, फुटबॉल कोच शहर में सुविधाओं के अभाव से खिलाड़ी पीछे रह जाते हैं। पार्कों में सीमेंटेड जमीन होने से कबड्डी खो-खो जैसे खेलों के लिए जगह नहीं मिल पाती है। अमर चौहान, कबड्डी कोच जिले में खिलाड़ियों के विकास के लिए बेहतर काउंसिलींग की सुविधा होनी चाहिए। एक ही कोच पर कई खेलों का दबाव नहीं होना चाहिए। -डॉ. लक्ष्मी देवी कोचों को भी समय-समय पर ट्रेनिंग मिलनी चाहिए, न्यूट्रिशन जागरूकता, खेल चोटों के उपचार और पुनर्वास की व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है। - अहमद बिलाल , लॉन टेनिस हमारी यूनिवर्सिटी में मुफ्त में खेलों की कोचिंग दी जाती है। कई खिलाड़ी यहां खेलकर बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं। हर संस्थान को ये जिम्मेदारी लेनी चाहिए। - साईंद सलमान साजिद, क्रिकेट कोच कुश्ती और अखाड़ा संस्कृति जैसे खेल सिमटते जा रहे हैं। इन खेलों के संरक्षण और विकास के लिए अलग से मैदान और प्रशिक्षण केंद्र विकसित किए जाने चाहिए। - सत्तम पहलवान, कुश्ती कोच
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 13, 2026, 18:27 IST
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