हाईकोर्ट की सख्ती: धोखाधड़ी और विश्वासघात जुड़वा नहीं जो एक-दूजे के बिना जी न सकें, मेरठ का समन आदेश रद्द
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी और अमानत में खयानत से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि दोनों अपराध जुड़वा बच्चे नहीं हैं, जो एक-दूसरे के बिना अस्तित्व में नहीं रह सकते। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों धाराओं की प्रकृति अलग-अलग और एक-दूसरे के विपरीत है। इसलिए बिना कानूनी परीक्षण के दोनों धाराओं में एक साथ संज्ञान लेना कानून की गंभीर अज्ञानता को दर्शाता है। मेरठ के मामले में रद्द किया समन आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की एकल पीठ मेरठ के एक मामले की सुनवाई कर रही थी। वर्ष 2025 में सिविल लाइंस थाने में अभिषेक गौतम के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात का मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने जांच के बाद आरोप पत्र दाखिल किया, जिसके आधार पर ट्रायल कोर्ट ने 29 सितंबर 2025 को संज्ञान लेते हुए याची के खिलाफ समन आदेश जारी कर दिया था। याची की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उसके खिलाफ लगाए गए आरोप मनगढ़ंत हैं और उनका वास्तविक तथ्यों से कोई संबंध नहीं है। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि निचली अदालत ने महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति की अनदेखी की है। यह भी पढ़ें:सेंट्रल मार्केट:सात दिन का अल्टीमेटम, सुंदरकांड का सहारा, धरनारत महिलाएं बोलीं- अब किसी से न लगाएंगे गुहार
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 19, 2026, 11:10 IST
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