Aligarh News: हाईकोर्ट ने दोहरे हत्याकांड में आरोपी को दी जमानत

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अलीगढ़ के एक बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड के आरोपी राजू को जमानत दे दी है। न्यायालय ने यह राहत फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की उस रिपोर्ट के आधार पर दी है, जिसने पुलिस की कहानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने फैसला दिया।ॉयह मामला वर्ष 2022 का है। जिले के लोधा थाने में हत्या, हत्या के प्रयास और बलवे की प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस का आरोप था कि आरोपी राजू सहित 14 आरोपियों ने रास्ते में रोककर राधा और भूरी सिंह नामक व्यक्तियों पर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं, जिससे दोनों की मौत हो गई। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने राजू के पास से एक .315 बोर का तमंचा बरामद होने का दावा किया था और वह 11 जुलाई 2022 से जेल में बंद था।सुनवाई के दौरान आरोपी के अधिवक्ता ने बताया कि यह आरोपी की तीसरी जमानत याचिका थी। इससे पहले उच्च न्यायालय की समवर्ती पीठ द्वारा 7 अगस्त 2023 और 24 अप्रैल 2024 को आरोपी की दो जमानत अर्जियां यह कहते हुए खारिज कर दी गई थीं कि .315 बोर के तमंचे से भी छर्रे वाली चोटें आ सकती हैं। पूर्व की सुनवाइयों के दौरान आरोपी के पास फॉरेंसिक रिपोर्ट उपलब्ध नहीं थी।मामले में नया मोड़ तब आया, जब आवेदक को 16 मार्च 2026 की एफएसएल रिपोर्ट प्राप्त हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक दोनों मृतकों के शरीर से छर्रे बरामद हुए थे। वहीं, एफएसएल रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ है कि मृतकों के शरीर में पाए गए छर्रे वास्तव में 12 बोर के अवैध तमंचे से दागे गए थे, जबकि पुलिस ने आरोपी राजू से 315 बोर का तमंचा बरामद दिखाया था।बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि दोनों हथियारों के बोर में भारी विसंगति है। इसके अलावा, एफआईआर में राजू को किसी भी विशिष्ट आग्नेयास्त्र से चोट पहुंचाने की कोई विशेष भूमिका नहीं सौंपी गई थी और उसे केवल सामान्य आरोपों के आधार पर झूठा फंसाया गया था।न्यायालय ने पाया कि मामले में कुल 28 में से सभी मुख्य तथ्य गवाहों सहित 17 गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं, जिससे अब सबूतों से छेड़छाड़ या गवाहों को डराने की कोई गुंजाइश नहीं बची है। राज्य सरकार के अपर शासकीय अधिवक्ता ने जमानत का कड़ा विरोध तो किया, लेकिन वे एफएसएल रिपोर्ट की इस तकनीकी विसंगति का खंडन नहीं कर सके।न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी को संबंधित न्यायालय की संतुष्टि पर एक व्यक्तिगत बंधपत्र और दो प्रतिभू जमा करने होंगे। जमानत पर रिहा होने के बाद आरोपी किसी भी आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं होगा और न ही गवाहों को प्रभावित करेगा। इसी के साथ आरोपी को जमानत दे दी गई।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 11, 2026, 01:56 IST
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