हिमाचल हाईकोर्ट: सेवामुक्ति सबसे कठोर सजा, बर्खास्तगी के फैसले को अनिवार्य सेवानिवृत्ति में बदला

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कृषि विभाग के एक अधिकारी की सेवा के बाद बर्खास्तगी के फैसले को अनुचित करार देते हुए इसे रद्द कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने बर्खास्तगी के आदेश को अनिवार्य सेवानिवृत्ति में तबदील कर दिया है। अदालत ने माना कि 19 वर्ष की लंबी सेवा और पारिवारिक परिस्थितियों को देखते हुए विभाग की ओर से दी गई बर्खास्ती की सजा बेहद कठोर और आत्मा को झकझोरने वाली थी। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने यह फैसला रक्ष पाल मामले में सुनाया। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि सेवामुक्ति सबसे कठोर सजा है, जो न केवल कर्मचारी बल्कि उसके पूरे आश्रित परिवार को आर्थिक और सामाजिक रूप से तबाह कर देती है। इसलिए इसका इस्तेमाल केवल अति-गंभीर मामलों (जैसे भ्रष्टाचार या धोखाधड़ी) में ही किया जाना चाहिए। खंडपीठ ने साथ ही कर्मचारी को सेवामुक्ति की तिथि से नियमानुसार सभी परिणामी वित्तीय लाभ 8 सप्ताह के भीतर प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Aug 22, 2026, 17:49 IST
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