Ambala News: बागवानी घोटाले में डीएचओ सहित तीन आरोपी पुलिस गिरफ्त से बाहर

अंबाला सिटी। बागवानी विभाग में मशरूम स्टैकिंग योजना और लो टनल योजना के नाम पर हुए घोटाले में जल्द ही अन्य आरोपियों गिरफ्तारी भी पुलिस कर सकती है। अभी तक इस मामले में पांच कर्मचारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस घोटाले को लेकर पिछले साल जनवरी में एसपी ने एक एसआईटी गठन किया था। एसआईटी की जांच में शुरुआती स्तर पर आठ लोगों के नाम सामने आए थे। इसमें तत्कालीन बागवानी अधिकारी सहित अन्य कर्मचारी शामिल थे। अब जांच आगे बढ़ी तो कुछ और लोगों को जांच में शामिल किया गया है। आर्थिक अपराध शाखा इस मामले की जांच कर रही है। गौरतलब है कि इस मामले में जिला बागवानी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लाखों रुपये की सब्सिडी हड़प ली। ---------------फर्जीवाड़े का पूरा गणित: कहां कितनी हुई लूटप्रारंभिक जांच और एसआईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी खजाने को तीन प्रमुख तरीकों से नुकसान पहुंचाया गया था।1. फर्जी ट्रेनिंग सर्टिफिकेट (मशरूम योजना): 9,06,000 की अवैध सब्सिडी।2. जाली जमाबंदी (जमीन के फर्जी कागजात): 1,93,750 की अवैध निकासी।3. नकली बांस खरीद बिल (लो-टनल योजना): 3,12,000 की फर्जी अदायगी।-------------सीएम फ्लाइंग स्क्वाड की छापेमारी में खुला राजइस पूरे घोटाले का भंडाफोड़ तब हुआ जब मुख्यमंत्री उड़नदस्ते को गुप्त सूचना मिली कि बागवानी विभाग के उच्च अधिकारी और कर्मचारी मिलकर फील्ड स्टाफ तथा फर्जी लाभार्थियों के साथ साठगांठ कर रहे हैं और सरकारी योजनाओं का पैसा डकार रहे हैं। फ्लाइंग स्क्वाड के तत्कालीन प्रभारी हितेंद्र कुमार ने बताया कि उन्होंने त्वरित कार्रवाई करते हुए वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान मशरूम स्टैकिंग योजना और लो टनल योजना के रिकॉर्ड को अपने कब्जे में लेकर जांच की। शुरुआती जांच में ही पाया गया कि आवेदन पत्रों पर चिपकाई गई तस्वीरें और लाभार्थियों के हस्ताक्षर आपस में मेल नहीं खा रहे थे।-----------सोनीपत के संस्थान के नाम पर बने जाली सर्टिफिकेटजांच टीम तब हैरान रह गई जब आवेदनों के साथ संलग्न प्रशिक्षण प्रमाणपत्रों की जांच की गई। ये प्रमाणपत्र क्षेत्रीय मशरूम अनुसंधान केंद्र, मुरथल (सोनीपत) द्वारा जारी किए गए दिखाए गए थे। जब टीम ने संबंधित संस्थान से इन दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन कराया, तो ये सभी सर्टिफिकेट पूरी तरह से फर्जी और जाली पाए गए। केवल इन नकली सर्टिफिकेट्स के दम पर ही 9,06,000 की सब्सिडी जारी करवा ली गई थी।----------अधिकारियों, कर्मचारियों और बिचौलियों का बड़ा गठजोड़घोटाले की गहराई को देखते हुए अंबाला के पुलिस अधीक्षक ने 30 जनवरी 2025 को एक विशेष जांच दल का गठन किया था। पुलिस ने इस मामले में थाना अंबाला सिटी में 28 जनवरी 2025 को प्राथमिकी दर्ज की थी।इस घोटाले की आंच विभाग के शीर्ष तक पहुंच रही है। जांच में तत्कालीन जिला बागवानी अधिकारी (डीएचओ) वीरेंद्र और दिनेश, अकाउंटेंट गुरविंदर सिंह व बलविंदर सिंह, बीएचसी अंकुश व शिवम और माली हैप्पी सिंह सहित कई अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई थी। पुलिस अब तक हैप्पी सिंह, शिवम, माली नवनीत, राजेश कुमार और अकाउंटेंट बलविंदर सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।------------बिना जमीन वाले किसानों के खातों में आई सरकारी रकममामले में एक और चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब तीन कथित लाभार्थियों गौरव कुमार, संदीप कुमार और श्याम लाल के बयान दर्ज किए गए। इन तीनों ने पुलिस के सामने कुबूल किया कि उनके पास कोई कृषि भूमि ही नहीं है और न ही उन्होंने किसी योजना के लिए आवेदन किया था, इसके बावजूद विभाग ने उनके खातों में 78,500 की सब्सिडी सीधे ट्रांसफर कर दी। इसके बाद आरोपी माली हैप्पी सिंह ने उनसे यह कहकर 70,000 नकद वापस ले लिए कि वह इस पैसे को दोबारा विभाग में जमा कराएगा। लेकिन हैप्पी सिंह ने वह राशि सरकारी खजाने में जमा कराने के बजाय खुद ही हजम कर ली।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 26, 2026, 02:50 IST
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