Iran-US: ईरान पर कितनी खतरनाक होगी अमेरिका-इस्राइल की सैन्य कार्रवाई, क्यों नहीं झुक रहे हैं खामेनेई?

मध्य एशिया किसका होगा अमेरिका-इस्राइल का या फिर ईरान की मनमानी चलेगी बड़ा सवाल है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप हलांकि युद्ध के पक्षधर नहीं रहते। उनके पहले पहले कार्यकाल में अमेरिका कोई युद्ध नहीं लड़ा था। धमकताते रह गए थे। इस बार ट्रंप धमकी से आगे निकले हैं। सामरिक रणनीति और कूटनीति के जानकार कहते हैं कि दूसरे कार्यकाल में वह ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का विकल्प अपना सकते हैं। ट्रंप ने बी-52 बंबर का 2025 में ईरान पर सीमित इस्तेमाल किया था। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ईरान को चेतावनी, धमकी से बाज नहीं आ रहे हैं। इसके जवाब में ईरान के सर्वोच्च नेता अया तुल्लाह अली खामेनेई उतना ही तीखा पलटवार कर रहे हैं। खामेनेई के पलटवार में गजब की आक्रमकता रहती है। वायुसेना के पूर्व अधिकारी एयरवाइस मार्शल एनबी सिंह कहते हैं कि अमेरिका मध्य एशिया में बड़ी सैन्य तैनाती कर रहा है। वैसे भी अमेरिका की मजबूरी है कि वह इस्राइल को अकेला नहीं छोड़ सकता। इस्राइल पर ईरान से लगातार खतरा बना हुआ है। एनबी सिंह कहते हैं कि बिना अमेरिकी सहयोग के लंबे समय तक चलने वाले युद्ध में इस्राइल ईरान का मुकाबला नहीं कर सकता। विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार कहते हैं कि देर सबेर लग रहा है ईरान और अमेरिका-इस्राइल आमने सामने होंगे। कुमार कहते हैं कि अभी अमेरिकी रणनीतिकार अपनी तैयारियों में जुटे हैं। अमेरिका की क्या है तैयारी मध्य एशिया में अमेरिका से के 19 सैन्य अड्डे हैं। फिलिस्तीन के हमास, यमन के हूती, लेबनान के हिज्बुलाह से इस्राइल की भिडंत को देखते हुए अमेरिका ने अपना अग्रिम विमान वाहक युद्धपोतअब्राहम लिंकन भी मध्य एशिया भेज दिया था। क्षेत्र में अमेरिका के परमाणु ऊर्जा से चालित दो विमान वाहक पोत पहुंच चुके हैं। पनडुब्बी और युद्धपोत, विध्वंसक पहले से ही क्षेत्र में मिशन पर हैं। लिंकन विमान वाहक पोत पर एप-18 सुपरपार्नेट, एफ-35 लड़ाकू विमान, अटैकिंग हेलीकाप्टर मौजूद हैं। यह इतना बड़ा और क्षमतावान है कि अपने आप में एक चलता फिरता शस्त्रागार है। इसके अलावा हवाई हमलों से सुरक्षा के लिए थॉड मिसाइल प्रणाली भी तैनात है। अमेरिका की चिंता क्या है अमेरिकी की पहली चिंता मध्य एशिया में बादशाहत बरकरार रखने की है। ईरान उसके काबू में नहीं आ रहा है। अपुष्ट खबर है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करने के करीब है। अमेरिकी रणनीतिकारों का मानना हैं कि हाइपरसोनिक मिसाइल वाले ईरान के पास परमाणु हथियार आने के बाद वह एक अमेरिका और इस्राइल के लिए बड़ा खतरा बन जाएगा। ईरान प्राक्सी और शैडो बाक्सिंग में मास्टर हो चुका है और ऐसे में वह बड़ा नासूर हो सकता है। रूस, चीन के साथ उसके निकट के रिश्ते हैं। सीरिया में बशर अल असद की सरकार को हटाने में अमेरिकी अभियान को ईरान का रूस के साथ खड़े होने से मुश्किल आई थी। यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद ईरान ने खुलकर रूस की सहायता से की थी। इसके अलावा चीन को साथ भी ईारान के अच्छे संबंध है। इससे ऊर्जा सुरक्षा, खनिज और आर्थिक क्षेत्र को लेकर अमेरिका असहज महसूस कर रहा है। आखिर क्यों नहीं झुक रहे हैं खामेनेई राष्ट्रपति ट्रंप की धमकी के बाद अयातुल्लाह अली खामेनेई अपने फार्म में आने में देर नहीं लगाते। वह इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंन्जामिन नेतेन्याहू की धमकी की परवाह नहीं करते और ट्रंप को हत्यारा, अपराधी तक कह देते हैं। सीधी चुनौती अमेरिका की दुनिया बरबाद करने की रहती है। एयरवाइस मार्शल एनबी सिंह कहते हैं कि जून 2025 में इस्राइल-ईरान युद्ध केवल 12 दिन चला था। शुरुआत में इस्राइल ने बड़ी बढ़त ले ली थी, लेकिन इस्राइल के हाई स्पीड हाइपरसोनिक दागते ही पूरा खेल पलट गया। अमेरिका और इस्राइल की कोई भी हवाई मिसाइल प्रतिरक्षा प्रणाली इन्हें रोक नहीं पाई। ईरान के पास हवा में ही अपने लक्ष्य को भेदने के लिए रास्ता बदल लेने में सक्षम मिसाइल प्रणाली भी है। इसकी काट नहीं है। अभी तक यह किसी को नहीं पता कि ईरान के पास इस तरह की कितनी मिसाइलें हैं। इससे भी घातक उसके पास कौन सी मिसाइल है। अमेरिका है नंबर वन फिर ईरान अमेरिका दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश है। सटीक हमला, तकनीकी युद्ध और हवाई हमले में इस्राइल का भी जवाब नहीं, लेकिन ईरान के कुछ शस्त्र उसे संजीवनी दे देते हैं। ईरान के पास 2000 किमी या इससे अधिक दूरी तक मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइलें हैं। इनकी जद में अमेरिका के लगभग 19 सैन्य अड्डे और पूरा इस्राइल आता है। फत्ताह-1 और फत्ताह-2 के बारे में कहा जाता है कि यह ध्वनि से 15 गुणा तेज गति से हमला कर सकती हैं। परमाणु हथियार लो जाने में सक्षम हैं और काफी सटीक वार करती हैं। खैबर मिसाइल प्रणाली 1800 किग्रा तक विस्फोटक ले जा सकती है। इसकी भी क्षमता 1500-200 किमी तक मार करने की है। सेजिल-2 ठोस ईधन वाली मिसाइल है। इसे बहुत कम समय में लांच किया जा सकता है। ईरान के पास इंटरकांटीनेंटल मिसाइल होने की भी खबरें आ रही हैं। इसकी क्षमता 10000 किमी तक है और अमेरिका तक मार कर सकती है। ईरान के पास आत्मघाती ड्रोन शाहिद-136, निगरानी और टोही ड्रोन शाहिद-147,मोहाजिर सिरीज के ड्रोन हैं। रूस की एस-400 ट्रायम्फ उसके आसमान की रक्षा कर सकती है। ईरान के प्रक्सी इराक, यमन, लेबनान समेत कुछ देशों से उसे युद्ध के समय बड़ा समर्थन दे सकते हैं। रूस और चीन से भी मदद की संभावना है। इसके अलावा उसके पास कुछ और खतरनाक हथियार होने की संभावना है। हालांकि फाइटर जेट समेत अन्य युद्ध प्रणालियों के मामले में उसकी स्थिति औसत है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 22, 2026, 17:23 IST
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