मणिपुरः इंफाल में फुटबॉल महज खेल नहीं, रोजमर्रा की जिंदगी की भाषा है, यहां डूरंड कप का घर जैसा लगना स्वाभाविक
इंफाल के खुमान लंपक मुख्य स्टेडियम की फ्लडलाइटें अभी जली भी नहीं हैं, लेकिन शहर के दर्जनों दूसरे हिस्सों में दिन का खेल शुरू हो चुका है। मोहल्लों के छोटे मैदानों, स्कूल परिसरों और घरों के बीच बची जमीन पर सुबह के मुकाबले शुरू हो जाते हैं। बच्चे लगातार इस्तेमाल से अपनी गोलाई खो चुकी गेंद के पीछे दौड़ते हैं। किशोर स्कूल की घंटी बजने से पहले खेल के लिए कुछ समय चुरा लेते हैं। एक गली और दूसरी गली की पुरानी प्रतिद्वंद्विता मैदान पर लौट आती है। दर्शकों में माताएं, दुकानदार और राह चलते लोग होते हैं। भारतीय खेल जगत में अब ऐसे बहुत कम स्थान बचे हैं, जहां फुटबॉल इस तरह रोजमर्रा की जिंदगी में घुला हुआ हो। यहां फुटबॉल सिर्फ देखा नहीं जाता, बोला भी जाता है—एक भाषा की तरह। एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक यह विरासत अपने आप पहुंचती रहती है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jul 29, 2026, 13:12 IST
मणिपुरः इंफाल में फुटबॉल महज खेल नहीं, रोजमर्रा की जिंदगी की भाषा है, यहां डूरंड कप का घर जैसा लगना स्वाभाविक #Football #LocalSports #International #InImphal #FootballNotMerelySportButLanguageOfEveryday #NaturalForTheDurandCupToFeelRight #SubahSamachar
