शांगरी-ला डायलॉग: तकनीक से मजबूत होगा हिंद-प्रशांत क्षेत्र,भारत ने डाला प्रौद्योगिकी साझेदारी पर प्रकाश

भारत ने शांगरी-ला संवाद 2026 के दौरान उच्च स्तरीय राजनयिक प्रयासों और अकादमिक सहभागिता के जरिये एक स्थिर व सुरक्षित हिंद-प्रशांत बनाने की बात कही है। रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को एक्स पर कहा, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने हिंद-प्रशांत सुरक्षा संरचना की मजबूती, रक्षा औद्योगिक सहयोग तथा उभरती प्रौद्योगिकी साझेदारियों पर अग्रणी थिंक टैंक व शिक्षाविदों से भारतीय रक्षा कूटनीति पर प्रकाश डाला। रक्षा सचिव ने एक स्थिर, सुरक्षित और समावेशी हिंद-प्रशांत के लिए भारत की रक्षा कूटनीति विषय पर क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक सहभागिता के लिए भारत के दृष्टिकोण को साझा किया। पोस्ट के अनुसार, इस चर्चा में सिंगापुर में भारतीय उच्चायुक्त शिल्पक अंबुले भी उपस्थित थीं, जो इस चर्चा के राजनयिक महत्व को रेखांकित करती है। बातचीत का मुख्य जोर सैन्य-से-सैन्य सहयोग मजबूत करने, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने पर रहा। इस बीच, अमेरिकी रक्षा (युद्ध) मंत्री पीट हेगसेथ ने मुख्य भाषण से पहले हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी रणनीतिक हितों की रक्षा के दूरदर्शी दृष्टिकोण की रूपरेखा स्पष्ट की। उनकी हिंद-प्रशांत क्षेत्र की यह चौथी यात्रा है। रणनीतिक जुड़ाव की जरूरत पर जोर भारत-अमेरिका ने शांगरी-ला संवाद में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रक्षा-सुरक्षा सहयोग की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। भारत ने नाटो सैन्य समिति के अध्यक्ष, नाटो एडमिरल ज्यूसेपे कैवो ड्रैगन के साथ भी बातचीत की। इस दौरान, रक्षा सचिव राजेश सिंह ने अमेरिका के इंडोपेकॉम (हिंद-प्रशांत कमान) के कमांडर, एडमिरल सैमुअल जे. पपरो के साथ चर्चा की। उन्होंने नाटो के साथ निरंतर रणनीतिक जुड़ाव बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। सुरक्षा चुनौतियों में बदलावों पर चर्चा रक्षा सचिव ने नाटो एडमिरल ज्यूसेपे कैवो ड्रैगन के साथ वैश्विक-क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों में हो रहे बदलावों पर चर्चा की। रक्षा मंत्रालय ने कहा, राजेश सिंह की वार्ता का केंद्र रणनीतिक संवाद बढ़ाने और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों में हो रहे बदलावों पर विचारों का आदान-प्रदान करना था। उन्होंने प्रमुख बहुपक्षीय रक्षा संगठनों के साथ रचनात्मक जुड़ाव बनाए रखना जरूरी बताया। दोनों पक्षों ने उभरती प्रौद्योगिकी साझेदारी पर प्रमुख थिंक टैंक और शिक्षाविदों से भी चर्चा की। राजनयिक संबंध गहरे करेंगे: ऑस्ट्रेलिया संवाद के दौरान ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्लेस ने कहा, हम सहयोग को मजबूत करने के लिए राजनयिक और रक्षा संबंधों को गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह प्रतिबद्धता विशेष रूप से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में है। यह शांगरी-ला संवाद एशिया का प्रमुख रक्षा-सुरक्षा शिखर सम्मेलन माना जाता है, जहां एशिया-प्रशांत, उत्तरी अमेरिका, यूरोप और पश्चिम एशिया के रक्षा मंत्रियों, सैन्य प्रमुखों, नीति निर्माताओं, व्यापारिक नेताओं और सुरक्षा विशेषज्ञों को क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा करने के लिए जुटते हैं। मुख्य भाषण देंगे हेगसेथ अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के संवाद में मुख्य भाषण देने की भी उम्मीद है। वह हिंद-प्रशांत में चीन से अमेरिकी रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए वाशिंगटन का पक्ष रखेंगे। हालांकि उन्होंने सिंगापुर पहुंचने पर पत्रकारों से शुरूआत में ही अपना रुख और एजेंडा प्रस्तुत किया। वह क्षेत्र में भारत को सर्वाधिक महत्व देते हैं क्योंकि चीन की बढ़ती आक्रामकता से निपटने में भारत काफी सक्षम है। संभव है कि वह भू-राजनीतिक स्थिति पर बोलते हुए ईरान से जारी युद्ध पर भी विचार रखें।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: May 30, 2026, 06:02 IST
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