मुद्दा: रेपो दर पर महंगाई का साया, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनाव के कारण अर्थव्यवस्था पर दबाव

महंगाई को चार फीसदी के लक्ष्य पर स्थिर रखने की प्रतिबद्धता, खाद्य कीमतों में उतार-चढ़ाव और अनिश्चित वैश्विक आर्थिक माहौल के कारण और विकास की रफ्तार को बनाए रखने के लिए सतर्क रुख अपनाते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने छह फरवरी, 2026 को नीतिगत ब्याज दर को 5.25 फीसदी के स्तर पर अपरिवर्तित रखा। रिजर्व बैंक का प्राथमिक लक्ष्य महंगाई को नियंत्रित करना है। इसलिए रिजर्व बैंक ने फिलहाल दरों को कम न करने का निर्णय लिया, ताकि महंगाई और न बढ़े।दुनिया भर में आर्थिक अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनावों के कारण अर्थव्यवस्था पर लगातार दबाव बना हुआ है। डॉलर के मुकाबले रुपये की अस्थिरता और बॉन्ड यील्ड के दबाव के कारण भी केंद्रीय बैंक ने रेपो दर में कटौती करने से गुरेज किया। दिसंबर, 2025 में रिजर्व बैंक ने रेपो दर में 0.25 फीसदी की कटौती की थी। वैसे, 2025 की शुरुआत से रिजर्व बैंक नीतिगत दरों में 125 आधार अंकों की कटौती कर चुका है, लेकिन अब तक बैंकों ने इसका पूरा फायदा ग्राहकों को नहीं दिया है, क्योंकि अब भी नए ऋणों में आधार अंकों की कटौती करना शेष है। रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत दरों को यथावत रखने के बाद भी उधारी दरों में कटौती की गुंजाइश बनी हुई है। नीतिगत दरों में कटौती नहीं करने के बावजूद जरूरत पड़ने पर रिजर्व बैंक नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में कटौती करके और ओपन मार्केट ऑपरेशंस (ओएमओ) के जरिये बैंकिंग प्रणाली की तरलता बढ़ा सकता है। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय बैंक 29 जनवरी, 2026 को हुई नीलामी सहित, ओएमओ के जरिये रिजर्व बैंक बैंकिंग प्रणाली में लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये डाल चुका है। भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास की गति अच्छी है। केंद्रीय बैंक ने मौद्रिक समीक्षा के दौरान वित्त वर्ष 2026 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के वृद्धि अनुमान को 7.3 फीसदी से बढ़ाकर 7.4 फीसदी कर दिया है, जबकि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में इसके 6.9 फीसदी रहने का अनुमान जताया है, जो इसके पहले 6.7 फीसदी था, वहीं, वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में जीडीपी के सात फीसदी रहने का अनुमान जताया है, जो पहले 6.8 फीसदी था। इसके अलावा, हाल ही में अमेरिकी सरकार ने टैरिफ को घटाकर 18 फीसदी कर दिया है, जिससे निर्यात में इजाफा, आर्थिक गतिविधियों में तेजी, व्यापार घाटे में कमी आने, विदेशी मुद्रा में इजाफा होने की उम्मीद है, जिससे अर्थव्यवस्था में और मजबूती आएगी। रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026 के दौरान महंगाई दर के 2.1 फीसदी रहने का अनुमान जताया है, जो पहले दो फीसदी थी। वहीं, वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में इसके 3.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया है, और वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के दौरान महंगाई के चार फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है। महंगाई के कारण लोगों की क्रय शक्ति में कमी, जीवनयापन की लागत में वृद्धि, और बचत के वास्तविक मूल्य में गिरावट आती है। इसका सबसे अधिक असर गरीबों पर पड़ता है, क्योंकि उन्हें बुनियादी जरूरतों, जैसे भोजन और स्वास्थ्य के मद में ज्यादा खर्च करना पड़ता है। यह आर्थिक विकास को भी बाधित करती है और कंपनियों के मुनाफे को भी कम करती है। महंगाई दर के जमा दर से अधिक होने पर बैंक में जमा पैसों की वास्तविक कीमत घट जाती है और भविष्य के लिए जमा की गई पूंजी कम हो सकती है और बुढ़ापे में वित्तीय संकट पैदा हो सकता है। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी, 2026 में, भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की ऋण वृद्धि दर धीमी होकर वर्ष-दर-वर्ष के आधार पर 13.1 फीसदी रह गई, जो दिसंबर, 2025 में 14.5 फीसदी थी। वहीं, पांच जनवरी, 2026 को खत्म हुए पखवाड़े तक जमा वृद्धि दर कम होकर वर्ष-दर-वर्ष के आधार पर 10.6 फीसदी रह गई। इस तरह, इस अवधि में बैंक जमा में लगभग 3 लाख 57 हजार करोड़ रुपये की कमी आई, जिससे क्रेडिट-डिपॉजिट (सीडी) अनुपात रिकॉर्ड 82.2 फीसदी के उच्च स्तर पर पहुंच गया। इसलिए अभी बैंक तरलता की कमी का सामना कर रहे हैं और उन्हें जरूरतमंदों को ऋण देने में मुश्किलें आ रही हैं। कुल मिलाकर, महंगाई आमजन और विकास की राह में एक बहुत बड़ी बाधा है। चूंकि, आगामी महीनों में इसमें तेजी आने की आशंका है, इसलिए, रिजर्व बैंक ने रेपो दर को यथावत रखा है। बैंक जमा में लगातार कमी आने के कारण बैंक पूंजी की भारी कमी का सामना कर रहे हैं। इसलिए ऋण वृद्धि दर में भी कमी आई है। अभी भले ही, केंद्रीय बैंक ने रेपो दर में कटौती नहीं की है, पर दूसरे विकल्पों यानी सीआरआर और ओएमओ के जरिये वह बैंकिंग प्रणाली में तरलता बढ़ा सकता है। चूंकि अभी अर्थव्यवस्था मजबूत है, इसलिए, महंगाई और विकास दर के बीच संतुलन बनाकर रखा जा सकता है। इस लिहाज से रिजर्व बैंक के रेपो दर को यथावत रखने के निर्णय को पूरी तरह से सही कहा जा सकता है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 10, 2026, 04:40 IST
पूरी ख़बर पढ़ें »




मुद्दा: रेपो दर पर महंगाई का साया, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनाव के कारण अर्थव्यवस्था पर दबाव #Opinion #National #Inflation #RepoRate #Economy #GlobalEconomic #Instability #GeopoliticalTensions #SubahSamachar