Israel Missile Attack on Iran: खामेनेई समेत कई ईरानी नेता मारे गए, अब ट्रंप-नेतन्याहू ने कर दी पुष्टि!

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पोस्ट किया, "इतिहास के सबसे बुरे लोगों में से एक, खामेनेई की मौत हो गई है.वह हमारे इंटेलिजेंस और बहुत एडवांस्ड ट्रैकिंग सिस्टम से बच नहीं पाया और इज़राइल के साथ मिलकर काम करते हुए, वो या उसके साथ मारे गए दूसरे नेता कुछ भी नहीं कर सके। ईरानी लोगों के लिए अपना देश वापस लेने का यह सबसे बड़ा मौका है। हम सुन रहे हैं कि उनके कई IRGC, मिलिट्री और दूसरी सिक्योरिटी और पुलिस फोर्स अब लड़ना नहीं चाहते और हमसे इम्युनिटी चाहते हैं। जैसा कि मैंने कल रात कहा था, 'अभी उन्हें इम्यूनिटी मिल सकती है, बाद में उन्हें सिर्फ मौत मिलेगी!" उम्मीद है कि IRGC और पुलिस शांति से ईरानी देशभक्त के साथ मिल जाएंगे और देश को उस महानता पर वापस लाने के लिए एक यूनिट के तौर पर मिलकर काम करेंगे जिसका वह हकदार है। यह प्रक्रिया जल्द ही शुरू हो जानी चाहिए क्योंकि न सिर्फ खामेनेई की मौत हुई है बल्कि देश सिर्फ एक दिन में पूरी तरह बर्बाद हो गया है और यहां तक कि पूरी तरह खत्म हो गया है। भारी और सटीक बमबारी पूरे हफ़्ते बिना रुके जारी रहेगी, या जब तक मिडिल ईस्ट और असल में पूरी दुनिया में शांति के हमारे मकसद को पाने के लिए ज़रूरी होगा। बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में यह दावा किया है कि अयातुल्ला अली खामेनेई, जो कई दशकों से ईरान के सर्वोच्च नेता हैं, संभवतः मारे गए हैं। नेतन्याहू ने अपने बयान में कहा कि ईज़राइल और अमेरिका के संयुक्त सैन्य हमलों में खामेनेई का परिसर निशाना बनाया गया और कई वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों को भी मार गिराया गया है। उन्होंने इन हमलों को “तोड़फोड़ करने वाला” बताया और कहा कि “यह दमनकारी तानाशाह अब संभवतः नहीं है” और उसके मरने के कई संकेत सामने आए हैं। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि इस कार्य का उद्देश्य ईरान के शासन को कमजोर करना और इस देश की “सुरक्षा खतरों” को समाप्त करना है। नेतन्याहू के अनुसार, संयुक्त हमलों में ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स के वरिष्ठ कमांडर, नाभिकीय कार्यक्रम से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी और अन्य उच्च-स्तरीय नेता भी लक्ष्य बने। उन्होंने यह दावा किया कि अगले कुछ दिनों में इन हमलों को जारी रखा जाएगा और कई और “आतंकवादी शासन के लक्ष्य” तबाह किए जाएंगे। उनका बयान तनावपूर्ण क्षेत्रीय परिस्थितियों के बीच आया है, जहाँ ऑपरेशन एपिक फ्यूरी नामक सैन्य अभियान चल रहा है। हालांकि, खामेनेई की मौत की पुष्टि किसी स्वतंत्र स्रोत से नहीं हुई है। ईरान की ओर से इस दावे का प्रबल खंडन किया गया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट कहा है कि खामेनेई “सुरक्षित और जिंदा” हैं और उनके बारे में जारी खबरें “मनोवैज्ञानिक युद्ध” का हिस्सा हैं। सरकारी ईरानी समाचार एजेंसियों ने भी बताया कि वे “स्थिरता से स्थिति का नेतृत्व कर रहे हैं” और उनके ऊपर किसी भी प्रकार की असत्यापित मौत की रिपोर्ट को खारिज किया है। इस तरह इस पूरे मामले में दो तरफ़ा बयानबाज़ी चल रही है: एक ओर इज़राइल और अमेरिका द्वारा किए गए हमलों के बाद नेतन्याहू ने खामेनेई के मारे जाने के “संकेत” देने की बात कही है, वहीं दूसरी ओर ईरानी शासन ने इसे पूरी तरह फर्जी और मिलिटरी प्रचार बताया है। किसी भी तरह की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक उपलब्ध नहीं है, और अंतरराष्ट्रीय मीडिया भी इस बारे में अलग-अलग रिपोर्टें प्रकाशित कर रहा है। राजनीतिक और सैन्य विश्लेषकों के मुताबिक, यदि खामेनेई की मौत सच साबित होती है तो यह पूरे मध्य पूर्व की राजनीति, ईरान की आंतरिक स्थिरता और वैश्विक स्तर पर सुरक्षा संतुलन को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर सकती है। लेकिन फिलहाल दोनों ही पक्षों के बयानों के बीच गंभीर असमंजस है और स्थिति का पूर्ण सत्य सामने आने में अभी समय और जांच की आवश्यकता है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 01, 2026, 04:37 IST
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