यह जामताड़ा है: छोटा सा कस्बा अब बन गया जिला; क्या पता सामने बैठा आदमी बड़ा साइबर ठग हो
झारखंड के जामताड़ा कस्बे में प्रवेश करने से पहले ही सड़क किनारे एक आदिवासी परिवार की चाय की दुकान पर चारपाई पड़ी है। उस पर बैठा शख्स खुद को मैट्रिक पास बता रहा है, पर बातों में वह अंग्रेजी और सूचना तकनीक का ऐसा ज्ञान दर्शाता है कि किसी को भी उसके सॉफ्टवेयर इंजीनियर होने का भ्रम हो सकता है। कहता है- यह जामताड़ा है, क्या पता किसी चाय की दुकान पर आपके सामने बैठा आदमी कोई बड़ा साइबर ठग हो। नाम नहीं छापनाफिर आप जो कहेंगे वह सब बता दूंगा। इस युवक के अनुसार, जामताड़ा के कुछ लड़कों ने सबसे पहले एटीएम के एमपिन को जानकर उससे पैसा निकालना शुरू किया। यह वर्ष 2013 के आसपास की बात है। लड़कों का यह ग्रुप एटीएम के आसपास मंडराता रहता। लोगों की मदद के नाम पर उनका पिन भी जान लेते और एटीएम कार्ड बदल देते। पास के ही गांव सिंदरजोरी का सीताराम मंडल मुंबई गया था। मोबाइल रिचार्ज की दुकान में नौकरी करते हुए उसने ठगी के गुर सीखे। इसके बाद कई युवाओं ने शुरू किया लोगों को फोन कर ओटीपी मांगने का खेल। ग्राहकों को उनके बैंक खाते में दिक्कत होने की बात कह कर पासवर्ड मांग लेते। पैसे आने लगे तो लड़के जोड़ने शुरू किए। सब मिलकर कॉल सेंटर की तरह काम करने लगे। ठगी का ऐसा दौर चला कि बड़े अभिनेताओं और राजनेताओं के खाते भी जामताड़ा के इन युवाओं ने खाली कर दिए। 23 लाख ठगे थे पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री अमरिंदर की पत्नी से जामताड़ा के अताउल अंसारी ने पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की पत्नी परणीत कौर से भी बैंक मैनेजर बनकर 23 लाख रुपये ठग लिए थे। अंसारी जेल भी गया था। उसकी तरह यहां पर गांवों में साइबर ठगों ने आलीशान घर बना रखे हैं। कुछ ठग ऐसे हैं, जिन्होंने अकेले ही ढाई हजार से ज्यादा लोगों के खाते से पैसे निकाल लिए। जामताड़ा जिले के ज्यादातर गांवों में साइबर ठगी का खेल चलता रहा है। पहले गांव के युवाओं की टोली एक साथ जंगल में जाती थी। वहीं से मोबाइल या लैपटॉप से कॉल कर ठगी करते थे। सख्ती के बाद गांवों से ये साइबर ठग शहरों की ओर चले गए हैं। कोलकाता, देवघर, दुर्गापुर और आसनसोल में फ्लैट लेकर वहीं से ठगी को अंजाम दिया जा रहा है। अब नहीं चलता ओटीपी का खेल युवक ने बताया कि वह कई बार जेल जा चुका है। अब उसने काम छोड़ दिया है। अब उसके पास जेसीबी मशीनें हैं। कई बड़े ठेके और एक बड़ी कंपनी का सीएसआर का काम भी वह कर रहा है। मशीनें खरीदने का पैसा कहां से आया, इस सवाल पर वह बस मुस्कुरा दिया। बोला-अब ओटीपी वोटोपी का खेल नहीं चलता है। अब कस्टमर केयर वेबसाइटों का सहारा लिया जाता है। यह देखा जाता है कि लोग आजकल किस समस्या का समाधान चाहते हैं। उससे जुड़ी वेबसाइट बनाई जाती है। उस पर लगातार अपडेट किया जाता है। गूगल को पैसे देकर प्रमोट किया जाता है। लगभग एक साल में गूगल के ऐड भी उस पर आने लगते हैं। इसके बाद लोगों को भी लगता है कि यह वेबसाइट सही ही होगी। दसवीं पास यह युवक कीवर्ड, टैगिंग, ऑनलाइन एलगोरिदम जैसे शब्द आसानी से प्रयोग कर रहा था। डार्क वेब पर आसानी से मिलता है डाटा युवक ने दावा किया कि आसानी से किसी भी सर्च इंजन पर जाकर डाटा लिया जा सकता है। डार्क वेब पर जाने के बाद तो बहुत से बोलीदार हैं जो किसी का भी डेटा बेचने का तैयार हैं। कुछ ही पैसों में मिला डाटा एक-एक साइबर ठग को लाखों से करोड़ों तक कमवा देता है। साइबर ठग प्रदीप मंडल पर जब ईडी ने छापा मारा तो उसके पास से लगभग 65 लाख की संपत्ति जब्त की गई। उसे बाद में पांच साल की सजा भी सुनाई गई। छोटा सा कस्बा अब बन गया जिला जामताड़ा झारखंड़ का छोटा सा कस्बा है। 2001 में यह जिला बना। बंगाल के आसनसोल से सीमा लगी होने के कारण यहां पर बंगाली संस्कृति का काफी प्रभाव है। जामताड़ा का अर्थ बताया गया कि जामा और ताड़ से बना है। जामा यानी सर्प और ताड़ यानी आवास। यहां पर काफी सांप पाए जाते हैं। लोग नहीं चाहते कि उनके जिले की पहचान साइबर क्राइम से ही रहे पर दबी जुबान में यह भी कहते हैं कि यह सारी चकाचौंध इसी पैसे के कारण है। किराए पर बैंक खाते, दूसरे राज्यों से लाए सिम शुरुआती दौर में तो ठगों ने गांव के मनरेगा मजदूरों या फिर अन्य छोटा-मोटा काम करने वालों के खाते किराए पर ले लिए। अब जहां ऑनलाइन कॉलिंग या वेबसाइटों के सहारे ठगी की जा रही है तो ऑनलाइन गेटवे के सहारे पैसा भी दूसरे देशों में पहुंचाया जा रहा है। अब सब यूएसडीटी में बदल लिया जाता है। यूएसडीटी एक क्रिप्टोकरेंसी है जो अमेरिकी डॉलर से जुड़ी है। कुचक्र के खिलाफ एक मुहिम पुलिस और साइबर सेल लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। कई साइबर ठगों को जेल भेजा गया है। पिछले साल यहां से 222 ठग गिरफ्तार किए हैं। सर्विलांस सिस्टम काफी मजबूत हुआ है। एक दिन जामताड़ा से कलंक जरूर हट जाएगा। - डॉ. एहतेशाम वकारिब, एसपी जामताड़ा
- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 03, 2025, 07:49 IST
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