Sonipat News: न्यायाधीशों के पास रहनी चाहिए न्यायिक निर्णय लेने की अंतिम जिम्मेदारी
सोनीपत। एआई आधारित प्रौद्योगिकियां विधिक अनुसंधान, दस्तावेज प्रबंधन, वाद प्रबंधन, अनुवाद व न्यायालयों के अन्य प्रशासनिक कार्यों को अधिक सुगम बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। यद्यपि प्रौद्योगिकी न्यायिक प्रक्रियाओं को अधिक सक्षम बना सकती है किंतु न्यायिक निर्णय लेने की अंतिम जिम्मेदारी सदैव न्यायाधीशों के पास ही रहनी चाहिए।यह बात डॉ. बीआर आंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय राई के कुलसचिव प्रो. (डॉ.) आशुतोष मिश्रा ने बेल्जियम के ब्रुसेल्स में आयोजित न्यायिक कार्यप्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं मशीन लर्निंग की भूमिका विषयक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए कही। कार्यक्रम का आयोजन सेंटर फॉर इंडो-यूरोपियन कोऑपरेशन, ब्रुसेल्स की ओर से किया गया। इस दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में न्यायिक प्रणाली के भविष्य पर विचार-विमर्श किया गया। इसमें प्रो. (डॉ.) आशुतोष मिश्रा ने न्यायिक प्रशासन को सुदृढ़ बनाने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं मशीन लर्निंग की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संवैधानिक मूल्य, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, नैतिक मानदंड व मानवीय संवेदनशीलता का स्थान कोई भी तकनीक नहीं ले सकती। उन्होंने विधि शिक्षा में तकनीकी नवाचारों के समावेशन की आवश्यकता पर बल दिया। कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता को न्यायाधीशों के विकल्प के रूप में नहीं बल्कि न्यायिक कार्यप्रणाली की दक्षता, पारदर्शिता, जवाबदेही व न्याय तक सरल पहुंच सुनिश्चित करने वाले प्रभावी सहयोगी उपकरण के रूप में देखा जाना चाहिए।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 29, 2026, 19:25 IST
Sonipat News: न्यायाधीशों के पास रहनी चाहिए न्यायिक निर्णय लेने की अंतिम जिम्मेदारी #JudgesShouldRetainTheUltimateResponsibilityForMakingJudicialDecisions. #SubahSamachar
