काका हाथरसी : चाय चक्रम

एकहि साधे सब सधे, सब साधे सब जाय, दूध- दही- फल अन्न-जल, छोड़ पीजिए चाय। छोड़ पीजिए चाय, अमृत बीसवीं सदी का, जग-प्रसिद्ध जैसे गंगाजल गंग नदी का। कहँ 'काका', इन उपदेशों का अर्थ जानिए, बिना चाय के मानव-जीवन व्यर्थ मानिए।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Aug 20, 2018, 15:18 IST
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