दोस्ताना: नीटू के कदम लड़खड़ाएंगे तो साथियों ने बांट लिया भार, कांवड़ में चार दोस्तों का दिखा ऐसा याराना
ये दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगेफिल्म शोलेका यह गीत हरिद्वारकांवड़ यात्रा के कठिनरास्ते में दोस्तों के उस याराने में जीवंत होता दिखा, जहां एकदोस्तकी मन्नत को तीन दोस्तों ने अपनी जिम्मेदारी मान लिया। रुड़की के चार बचपन के दोस्तों ने दोस्ती कीमिसाल पेश की। 19 साल के नीटू ने जब पहली बार कांवड़ उठाने और 70 लीटर गंगाजल लेकर अपने गंतव्य तक पहुंचने की ठानी, तो उसके तीन दोस्त उसकी हिम्मत बन गए। 18 साल के नीटू के तीनों साथी पिछली बार कांवड़ लेकर आ चुके थे, लेकिन इस बार उनका सफर अपने लिए नहीं, अपने दोस्त के लिए था। मयंक (21), विवेक (17) और राहुल (22) ने तय किया कि नीटू जहां थकेगा, वहां उसका हाथ थामेंगे। जहां कंधे जवाब देंगे, वहां कांवड़ का भार बांट लेंगे और जब कदम लड़खड़ाएंगे तो बम भोले के जयघोष से हौसला बढ़ाएंगे। नीटू ने जब कांवड़ लाने का तय किया था तो सबसे पहले वह अपने दोस्तों के ही पास पहुंचा। 70 लीटर जल लेकर चलना आसान नहीं था। कंधों पर कांवड़ का भार बढ़ता तो कभी कोई दोस्त कांवड़ को संभालकर ठीक करता, तो कभी कपड़ा इस तरह जमा देता कि चुभन और कंधे पर पड़ रहा दबाव थोड़ा कम हो जाए। थकान चेहरे पर दिखती तो दोस्तों की आवाज अचानक तेज हो जातीबम भोले जय भोलेमानो जयघोष नहीं, दोस्त के कदमों को आगे बढ़ाने की ताकत हो। मयंक से जब पूछा गया कि आखिर उसकी अपनी मन्नत क्या है, तो जवाब था वो दिल छू लेने वाला था। उसने कहा, बस अपना यार खुश रहना चाहिए। उसकी मन्नत पूरी होगी तो हमारी भी मन्नत समझो पूरी हो गई।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Aug 12, 2026, 13:37 IST
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