कर्नाटक विधान परिषद चुनाव: चार सीटों पर मतदान शुरू, कांग्रेस के सामने भाजपा गठबंधन की चुनौती; 27 को नतीजे

कर्नाटक विधान परिषद की चार सीटों पर शुक्रवार सुबह आठ बजे से मतदान जारी है। सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा-जेडीएस गठबंधन के बीच इन सीटों पर मुकाबला है। मतदान शाम चार बजे तक चलेगा, जबकि मतगणना 27 अक्तूबर को होगी। इस चुनाव को भाजपा और जेडीएस के बीच तालमेल के साथ-साथ स्नातक और शिक्षक मतदाताओं के बीच कांग्रेस के समर्थन की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। किन चार सीटों पर हो रहा है चुनाव जिन चार निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान हो रहा है, उनमें दक्षिण-पूर्व स्नातक, पश्चिम स्नातक, उत्तर-पूर्व शिक्षक और बंगलूरू शिक्षक सीट शामिल हैं। भाजपा ने तीन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि उसकी सहयोगी जेडीएस बंगलूरू शिक्षक सीट पर चुनाव लड़ रही है। भाजपा फिलहाल चार में से तीन सीटों पर काबिज है और उन्हें बरकरार रखना चाहती है। वहीं, जेडीएस की नजर बंगलूरू शिक्षक सीट पर है, जहां से कांग्रेस को हटाने की कोशिश है। चारों सीटों पर किसके बीच मुकाबला है दक्षिण-पूर्व स्नातक सीट पर कांग्रेस के शशि हुलिकुंटे मठ का मुकाबला भाजपा के केएम सुरेश से है। पश्चिम स्नातक सीट पर कांग्रेस के मोहन लिम्बिकाई के सामने भाजपा के मौजूदा विधान परिषद सदस्य एसवी संकनूर हैं। उत्तर-पूर्व शिक्षक सीट पर कांग्रेस के शरणप्पा मत्तूर और भाजपा के मौजूदा सदस्य शशिल जी. नमोशी आमने-सामने हैं। वहीं, बंगलूरू शिक्षक सीट पर कांग्रेस के विधान परिषद सदस्य पुट्टन्ना का मुकाबला जेडीएस के एपी रंगनाथ से है। बंगलूरू शिक्षक सीट पर मुकाबला क्यों अहम है बंगलूरू शिक्षक सीट का मुकाबला खास माना जा रहा है, क्योंकि पुट्टन्ना पिछले विधानसभा चुनाव से पहले जेडीएस छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए थे। पुट्टन्ना और जेडीएस उम्मीदवार एपी रंगनाथ दोनों वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं। ऐसे में इस सीट पर मुकाबला दोनों दलों के लिए अहम है। चुनाव यह भी परखेगा कि भाजपा और जेडीएस एक-दूसरे के उम्मीदवारों के पक्ष में अपने समर्थकों का वोट कितना स्थानांतरित करा पाते हैं। यह भी पढ़ें:महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव: पांच सीटों पर 182 उम्मीदवार; महायुति और एमवीए की ताकत का इम्तिहान क्यों चुनाव का सरकार और विधान परिषद की ताकत पर क्या असर पड़ेगा कांग्रेस इस चुनाव में अपनी एकमात्र सीट बरकरार रखने के साथ दूसरी सीटों पर भी बढ़त बनाने की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद, मंत्रियों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में प्रचार किया है। हालांकि, नतीजों से राज्य सरकार की स्थिरता पर असर पड़ने की उम्मीद नहीं है, लेकिन विपक्षी गठबंधन का अच्छा प्रदर्शन कांग्रेस सरकार के खिलाफ उसे राजनीतिक मुद्दा दे सकता है। कांग्रेस 2023 में सत्ता में आई थी। वर्तमान में 75 सदस्यीय विधान परिषद में कांग्रेस के 38, भाजपा के 24 और जेडीएस के छह सदस्य हैं। एक निर्दलीय सदस्य और सभापति सलीम अहमद भी सदन में हैं। सरकार की ओर से मनोनीत की जाने वाली पांच सीटें खाली हैं। इन रिक्त सीटों पर नियुक्तियां होने के बाद कांग्रेस की संख्या बढ़ने की उम्मीद है, जिससे चुनाव के नतीजों का सदन में कुल राजनीतिक संतुलन पर असर सीमित रह सकता है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Oct 23, 2026, 05:19 IST
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