किच्छा-सिरौलीकलां पालिका चुनाव: सुप्रीम फैसले से हाई-प्रोफाइल बना मुकाबला, तय हुई मतगणना की तारीख

किच्छा और सिरौलीकलां नगर पालिका का चुनाव परिणाम प्रतिष्ठा, हंगामे और अदालत की लंबी लड़ाई की कहानी बन गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने दोनों निकायों के लिए चुनाव कार्यक्रम जारी किया था कि 10 सितंबर को नामांकन, 13 को नाम वापसी, 22 को मतदान और 24 सितंबर को मतगणना होगी। सब कुछ तय कार्यक्रम पर चल रहा था लेकिन मतपेटियों के आगे पर्दा टांगने पर किच्छा में सियासी पारा चढ़ गया। पर्दे वाली घटना के बाद स्ट्राॅन्ग रूम पर विधायक तिलक राज बेहड़ और पूर्व विधायक राजेश शुक्ला और उनके समर्थक आमने-सामने आ गए थे। हंगामा, नारेबाजी और धक्का-मुक्की के बाद माहौल बिगड़ गया। प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देकर मतगणना टाल दी। मामला नैनीताल हाईकोर्ट पहुंचा। सरकार और प्रशासन ने कोर्ट से दो सप्ताह का समय मांगा। हाईकोर्ट ने तीन सप्ताह में मतगणना कराने का निर्देश दिया लेकिन कांग्रेस को यह देरी रास नहीं आई। कांग्रेस प्रत्याशी की ओर से अलीना मलिक ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर जल्द मतगणना की मांग की। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए बुधवार (सात अक्तूबर) को मतगणना कराने का आदेश दे दिया। यह चुनाव कांग्रेस प्रत्याशी राजेश प्रताप सिंह बनाम भाजपा के संदीप अरोड़ा का नहीं बल्कि विधायक बेहड़ और पूर्व विधायक शुक्ला की प्रतिष्ठा का बन गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब सबकी नजरें बुधवार पर टिकी हैं। देखना दिलचस्प होगा कि किच्छा की जनता ने किसे अपने नगर की सरकार का ताज पहनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम निर्णय सुनाया है। सरकार और प्रशासन मतगणना जबरदस्ती रोकना चाहते थे जिसे सुप्रीम कोर्ट ने नकार दिया। फैसला जो आएगा सर्वमान्य होगा। - तिलक राज बेहड़, विधायक, किच्छा सुप्रीम कोर्ट का निर्णय स्वीकार्य है। नतीजे को हम स्वीकार करेंगे। जनता का रुख भाजपा की ओर रहा। हमें उम्मीद है कि भाजपा का प्रत्याशी जीत दर्ज करेगा। - राजेश शुक्ला, पूर्व विधायक मतगणना की तारीख तय होने पर कांग्रेसियों ने बांटे लड्डू किच्छा और सिरौलीकलां नगर पालिका चुनाव में हुए मतदान के बाद मतगणना की तारीख तय होने से कांग्रेस कार्यकर्ता खुश हैं। कार्यकर्ताओं ने शिव मंदिर, आवास विकास में लड्डू बांटे और एक-दूसरे का मुंह भी मीठा कराया। कांग्रेस नेता संजय जुनेजा ने कहा कि सत्य को प्रताड़ित किया जा सकता है लेकिन पराजित नहीं किया जा सकता। मतगणना में जो स्थानीय प्रशासन की ओर से अड़ंगा लगाया गया था वह अब समाप्त हो गया है। सात अक्तूबर को मतगणना होना लोकतंत्र और संविधान की जीत है। वहां पार्षद सौरव राज बेहड़, पार्षद जितेश शर्मा, करन चीमा,आशित वाला, राकेश अधिकारी, हरीश कुमार, संदीप सिंह, रवि मिश्रा, कुणाल खुराना आदि थे।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Oct 06, 2026, 07:31 IST
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