Madras HC: 'लिव-इन में रह रही महिलाओं को मिलना चाहिए पत्नी का दर्जा', कोर्ट ने कहा- पुरुष रिश्ते बनाते हैं

मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने अपने एक अहम फैसले में कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही महिलाओं को सुरक्षा देने के लिए उन्हें पत्नी का दर्जा दिया जाना चाहिए। फैसले के दौरान अदालत ने गंधर्व विवाह की अवधारणा का उल्लेख भी किया। यह भी पढ़ें - High Court: ओडिशा हाईकोर्ट का केंद्र को सख्त संदेश, कहा- शहीदों के परिवारों का भरोसा न टूटे; जानें मामला आरोपी व्यक्ति की अग्रिम जमानत याचिका खारिज अदालत ने यह टिप्पणी शादी का वादा कर महिला से शारीरिक संबंध बनाने के आरोपी व्यक्ति की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए की। जस्टिस एस श्रीमती ने यह भी कहा कि अक्सर पुरुष लिव-इन रिलेशनशिप के दौरान खुद को आधुनिक सोच वाला बताते हैं, लेकिन जब रिश्ता बिगड़ता है तो वही पुरुष महिला के चरित्र पर सवाल उठाने लगते हैं। यह चिंताजनक प्रवृत्ति बन चुकी है। भले ही लिव-इन रिलेशनशिप को कुछ लोग सांस्कृतिक झटका मानते हों, लेकिन आज की वास्तविकता में यह आम हो चुका है। कई युवा महिलाएं इसे आधुनिक विकल्प समझकर अपनाती हैं, पर बाद में उन्हें पता चलता है कि कानून उन्हें स्वतः पत्नी जैसी सुरक्षा नहीं देता। मामला पुलिस तक पहुंचने के बाद आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए कोर्ट से अग्रिम जमानत की मांग की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। यह भी पढ़ें - IAF: 'आर्थिक ताकत काफी नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सैन्य शक्ति जरूरी', वायुसेना प्रमुख का बयान धोखे से शारीरिक संबंध कानूनन अपराध हाईकोर्ट ने अपने फैसले में प्राचीन गंधर्व विवाह की का उल्लेख किया, जिसमें स्त्री और पुरुष की आपसी सहमति से संबंध को मान्यता दी जाती थी। जस्टिस श्रीमती ने कहा कि भारतीय परंपरा में भी ऐसे संबंध पूरी तरह से अज्ञात नहीं रहे हैं। उन्होंने बीएनएस की धारा 69 का हवाला दिया, जिसके तहत धोखे या झूठे विवाह वादे के आधार पर बनाए गए शारीरिक संबंध को अपराध माना गया है। अन्य वीडियो

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 22, 2026, 04:35 IST
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