Polls: महाराष्ट्र के निकाय चुनाव में ओवैसी की बड़ी जीत, AIMIM ने 126 सीटें पर मारी बाजी; समझें सियासी गणित
महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों में इस बार नतीजों ने सबका ध्यान खींचा है। एआईएमआईएम ने राज्य भर में 126 सीटें जीतकर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाई है। खास तौर पर छत्रपति संभाजीनगर में पार्टी की जीत ने सियासी समीकरणों को नई दिशा दी है। इन नतीजों को केवल स्थानीय चुनाव तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे आने वाले बड़े चुनावों का संकेत भी माना जा रहा है। पार्टी प्रमुख ओवैसी की सक्रिय भूमिका को इस जीत की बड़ी वजह बताया जा रहा है। ओवैसी ने इस बार पहले की तुलना में ज्यादा समय चुनाव प्रचार को दिया। घर-घर जाकर संपर्क किया गया और छोटे इलाकों में स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। पार्टी नेताओं के मुताबिक, पिछली बार मिली करीबी हारों ने कार्यकर्ताओं को और ज्यादा मेहनत करने के लिए प्रेरित किया, जिसका सीधा असर नतीजों में दिखा। ये भी पढ़ें-इंडिगो ने 3-5 दिसंबर की रद्द उड़ानों का किया पूरा रिफंड, ट्रैवल वाउचर भी दिए; डीजीसीए ने दी जानकारी किन शहरों में एआईएमआईएम को कितनी सीटें मिलीं एआईएमआईएम ने छत्रपति संभाजीनगर में 33 सीटें जीतीं। मालेगांव में पार्टी को 21 सीटें मिलीं। अमरावती में 12, नांदेड़ में 14, धुले में 10 और सोलापुर में आठ सीटों पर जीत दर्ज हुई। इसके अलावा मुंबई में आठ, नागपुर में छह, ठाणे में पांच, अकोला में तीन, अहिल्यनगर और जलना में 2-2 और चंद्रपुर में एक सीट एआईएमआईएम के खाते में गई। पार्टी नेताओं का कहना है कि पिछले नगर निकाय चुनावों में मिली 80 सीटों से उन्हें शहरी मतदाता की सोच समझने में मदद मिली, जिसका फायदा इस बार साफ दिखा। चुनावी रणनीति में क्या खास रहा छत्रपति संभाजीनगर में टिकट बंटवारे को लेकर शुरुआत में असंतोष रहा। ओवैसी की मौजूदगी और प्रभावशाली इलाकों में रैलियों से माहौल बदला। नाराज नेताओं से बातचीत कर करीब 70 प्रतिशत को दोबारा जोड़ा गया। छोटे-छोटे कार्यक्रमों में स्थानीय नगर निकाय समस्याओं को उठाया गया। विपक्षी दलों की आपसी खींचतान को चुनावी मौके में बदला गया। पिछली हार ने कार्यकर्ताओं को कैसे जोड़ा पार्टी नेताओं के मुताबिक, 2024 के विधानसभा चुनाव में औरंगाबाद पूर्व से इम्तियाज जलील की बेहद करीबी हार ने कार्यकर्ताओं को गहरी ठेस पहुंचाई थी। इसी नाराजगी और दुख ने इस बार उन्हें और मजबूती से मैदान में उतारा। कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर वोट मांगे और लोगों को स्थानीय समस्याओं से जोड़ा। इसका नतीजा यह रहा कि एआईएमआईएम को कई शहरों में उम्मीद से बेहतर समर्थन मिला। ये भी पढ़ें-लो-प्रोफाइल सीटों के नतीजों ने सबको चौंकाया; इन जगहों की जीत ने भी बटोरीं सुर्खियां इन नतीजों के क्या राजनीतिक मायने हैं एआईएमआईएम की 126 सीटों की जीत यह दिखाती है कि पार्टी महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत कर चुकी है। मुंबई से लेकर चंद्रपुर तक जीत दर्ज करना इस बात का संकेत है कि पार्टी अब सीमित इलाकों तक नहीं रहना चाहती। आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों से पहले यह प्रदर्शन दूसरे दलों के लिए भी चुनौती बन सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन नतीजों से राज्य की सियासत में नए समीकरण बन सकते हैं। अन्य वीडियो-
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jan 16, 2026, 22:50 IST
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