Maharashtra Politics: 'शिंदे के हाथों खुद को बेच दिया', उद्धव गुट के विधायक ने बागी सांसदों पर लगाए कई आरोप

महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। उद्धव ठाकरे गुट के एक विधायक ने दल बदलने वाले सांसदों पर कड़ा हमला बोला। शिवसेना (यूबीटी) के विधान परिषद सदस्य अंबादास दानवे ने आरोप लगाया कि पार्टी छोड़कर शिंदे गुट में जाने वाले सांसदों ने खुद को बेच दिया है। उन्होंने सांसदों के इस दावे को भी खारिज कर दिया कि विकास कार्यों के लिए फंड नहीं मिलने की वजह से उन्होंने पार्टी छोड़ी। सोमवार को शिवसेना (यूबीटी) के नौ में से छह लोकसभा सांसद आधिकारिक तौर पर शिंदे गुट में शामिल हो गए थे। इसके बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। शिंदे गुट में शामिल होने वाले सांसदों में संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दिना पाटिल, नागेश पाटिल अष्टीकर, ओमप्रकाश राजेनिंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे शामिल हैं। इनमें से कुछ सांसदों ने कहा था कि सत्ता पक्ष में शामिल होने से उनके संसदीय क्षेत्रों में बड़े विकास कार्यों को गति मिलेगी। क्या बोले अंबादास दानवे विधान भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अंबादास दानवे ने कहा कि पार्टी छोड़ने वाले सभी छह सांसदों ने खुद को बेच दिया है। उन्होंने कहा कि सांसदों का यह दावा पूरी तरह गलत और भ्रामक है कि उन्हें विकास निधि नहीं मिल रही थी। दानवे ने आरोप लगाया कि शिंदे और इन सांसदों के बीच क्या समझौता हुआ है, इसकी जानकारी भी जल्द सामने आएगी। उनके इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है। अंबादास दानवे ने ये आरोप लगाए- शिंदे गुट में शामिल होने के लिए 'खुद को बेच दिया'। विकास कार्यों के लिए फंड नहीं वाली बात गलत और भ्रामक है। सांसदों और एकनाथ शिंदे के बीच डील हुई है। सांसदों ने विचारधारा नहीं, बल्कि स्वार्थ के लिए पार्टी छोड़ी है। शिंदे गुट पर मूल विचारधारा से भटकने का भी आरोप लगाया। ये भी पढ़ें-Weather Update:दिल्ली-एनसीआर में बदला मौसम का मिजाज, बारिश से मिली राहत; कई इलाकों में चली धूल भरी आंधी किन सांसदों ने छोड़ा उद्धव ठाकरे का साथ शिवसेना (यूबीटी) छोड़कर शिंदे गुट में शामिल होने वाले सांसदों में यवतमाल से संजय देशमुख, परभणी से संजय जाधव, मुंबई उत्तर-पूर्व से संजय दिना पाटिल, हिंगोली से नागेश पाटिल अष्टीकर, धाराशिव से ओमप्रकाश राजेनिंबालकर और शिरडी से भाऊसाहेब वाकचौरे शामिल हैं। इन सांसदों के जाने से लोकसभा में उद्धव ठाकरे गुट की ताकत और कमजोर हुई है, जबकि शिंदे गुट की संख्या बढ़ गई है। विधायकों की बैठक को लेकर क्या कहा गया उद्धव ठाकरे द्वारा सोमवार को बुलाई गई बैठक में तीन विधायकों की अनुपस्थिति को लेकर भी सवाल उठे। इस पर अंबादास दानवे ने कहा कि महाविकास अघाड़ी की एक और बैठक बुलाई गई है, जिसमें सभी विधायक मौजूद रहेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी एकजुट है और विपक्षी गठबंधन पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ेगा। शिवसेना भवन को लेकर क्यों छिड़ा विवाद शिंदे गुट द्वारा अलग पार्टी कार्यालय बनाने की खबरों पर भी दानवे ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मुंबई के दादर स्थित मूल शिवसेना भवन की पवित्रता और सम्मान को कोई नई इमारत कभी नहीं छू सकती। दानवे ने कहा कि असली शिवसैनिकों के लिए शिवसेना भवन एक भावनात्मक प्रतीक है और किसी नए भवन को वह सम्मान नहीं मिल सकता। उन्होंने यह भी मांग की कि पार्टी के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी करने वाले नेताओं पर कार्रवाई की जानी चाहिए।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 23, 2026, 13:27 IST
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