महावीर प्रसाद मधुप : क्या सोचा था पर देखो क्या हो रहा
क्या सोचा था पर देखो क्या हो रहा घिरी निराशा, नाव फँसी मझधार है, सभी दिशाओं में बस हाहाकार है। तूफानों का ज़ोर, किनारा दूर है, चूर नशे में, बेसुध खेवनहार है॥ कर्णधार है नौका स्वयं डुबो रहा। क्या सोचा था पर देखो क्या हो रहा!
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 30, 2026, 21:16 IST
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